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स्थान: दिल्ली
लेखक: कुमारी सुनिधि राज
प्रकाशन तिथि: बुधवार, 21 जनवरी, 2026, 6:15 [IST]
Republic Day 2026 की भव्य तैयारियां: ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और आत्मनिर्भरता का अद्भुत संगम
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कर्तव्य पथ (Kartavya Path) एक बार फिर इतिहास और आधुनिकता के साक्षी बनने जा रहा है। 26 जनवरी 2026 को होने वाली यह परेड सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और ‘आत्मनिर्भर’ बनने की अटूट आकांक्षा का एक जीवंत कोलाज होगी। इस बार का आयोजन ऐतिहासिक है क्योंकि यह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित है।
‘मंत्र’ पर आधारित केंद्र सरकार की थीम
केंद्र सरकार ने इस वर्ष के समारोह को दो साझा थीम्स ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ पर तैयार किया है। देश के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां अपनी कला और संदेश से दर्शकों को भारतीय गौरव का अहसास कराने के लिए तैयार हैं।
गणतंत्र दिवस 2026: प्रमुख आकर्षण
- ‘वंदे मातरम्’ का प्रदर्शन: झांकियों के माध्यम से इस राष्ट्रगान के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और राष्ट्रीय चेतना को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
- आत्मनिर्भरता का संदेश: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को रक्षा, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।
कर्तव्य पथ पर अपनी संस्कृति बिखेरेंगे ये राज्य
इस वर्ष 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां परेड का हिस्सा होंगी:
- उत्तर भारत: उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड संस्कृति), राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब।
- दक्षिण भारत: तमिलनाडु (EV मैन्युफैक्चरिंग हब), केरल (वाटर मेट्रो और 100% डिजिटल), पुडुचेरी।
- पूर्व और पूर्वोत्तर: पश्चिम बंगाल, ओडिशा (मिट्टी से सिलिकॉन तक), असम, मणिपुर, नागालैंड।
- पश्चिम भारत: गुजरात, महाराष्ट्र।
केंद्र सरकार की 13 विभागीय झांकियां
राज्यों के अलावा केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय अपनी उपलब्धियां प्रस्तुत करेंगे। इनमें संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम्: राष्ट्र की आत्मा’ मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही, आयुष, गृह मंत्रालय (NDRF), रक्षा, शिक्षा और कौशल विकास जैसे विभाग भी शामिल हैं।
रोटेशन पॉलिसी: कौन से राज्य इस साल नहीं?
रक्षा मंत्रालय की नई रोटेशन नीति (2024-2026) के तहत, सभी राज्यों को तीन साल के चक्र में मौका देने के उद्देश्य से कुछ राज्यों को इस वर्ष अवसर नहीं मिला है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, मेघालय, झारखंड, गोवा, दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की झांकियां शामिल नहीं हैं।
कड़ी परीक्षा से गुजरती हैं झांकियां
झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति करती है। यह प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी है:
- पहला चरण: स्केच और डिजाइन का मूल्यांकन।
- दूसरा चरण: 3-डी मॉडल तैयार किया जाता है।
- अंतिम चरण: संगीत, रंग और संदेश की सटीकता के बाद ही अंतिम मुहर लगती है।
समिति में विशिष्ट कलाकार, संस्कृतिकर्मी और पद्म पुरस्कार विजेता शामिल हैं।
विशेष अतिथि और सांस्कृतिक जुड़ाव
समारोह में समावेशिता बनाए रखने के लिए देश के विभिन्न कोनों से 400 जनजातीय मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। साथ ही, तकनीक, स्टार्ट-अप और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़े करीब 5,000 विशेष मेहमान भी इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनेंगे।
एनक्लोजर का नामकरण: नदियां और वाद्य यंत्र
समारोह को भारतीय रंगों से सजाने के लिए दर्शकों के बैठने वाले एनक्लोजर (Enclosures) का नामकरण प्रमुख नदियों—गंगा, यमुना, गोदावरी के नाम पर किया गया है। वहीं, ‘बीटिंग द रिट्रीट’ समारोह के लिए एनक्लोजर के नाम भारतीय संगीत के वाद्य यंत्रों (वीणा, मृदंगम आदि) पर आधारित हैं।
2026 का यह गणतंत्र दिवस समारोह भारतीय गौरव, आधुनिकता और सांस्कृतिक धरोहर का एक ऐसा अद्भुत संगम पेश करेगा, जो दुनिया को भारत की बढ़ती शक्ति का परिचय देगा।
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