शशि थरूर का वेनेजुएला पर बड़ा बयान: यह तेल की लड़ाई है, लोकतंत्र नहीं

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Venezuela संकट पर बोले Shashi Tharoor, यह सत्ता परिवर्तन नहीं, Trump का Oil गेम है

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थरूर का तंज: वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन नहीं, ‘तेल लूट’ की कवायद

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक शशि थरूर ने वेनेजुएला में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई को लोकतांत्रिक हस्तक्षेप न बताते हुए इसे एक ‘तख्तापलट’ करार दिया। थरूर ने कहा कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सत्ता को जबरन उखाड़ फेंका गया है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान थरूर ने वेनेजुएला के हालात को ‘अजीबोगरीब’ बताया। उन्होंने तर्क दिया कि "सरकार के मुखिया (राष्ट्रपति) को हटा दिया गया है, लेकिन सत्ता का सिलसिला वही है।" थरूर ने बताया कि वेनेजुएला के सभी मंत्री, राष्ट्रीय सभा, सुरक्षा बल और ब्यूरोक्रेसी पहले की ही तरह काम कर रही है। अंतरिम राष्ट्रपति (जो पूर्व उपराष्ट्रपति हैं) के पदभार संभालने के बावजूद सिस्टम में कोई बदलाव नहीं आया है। थरूर ने इसे "सत्ता का बेदखली एडिशन" बताया, जो सत्ता परिवर्तन की जगह एक जबरदस्ती का कदम है।

तेल की आंखों पर पट्टी और लोकतंत्र के नाम पर सवाल

थरूर ने इस कवायद के पीछे की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम वेनेजुएला में लोकतंत्र स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि तेल के लिए उठाया गया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों का हवाला दिया जिसमें उन्होंने खुले तौर पर वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की बात कही थी। थरूर ने कहा, "सरकार परिवर्तन लोकतंत्र के नाम पर नहीं हुआ। इसके बजाय ट्रंप ने खुलकर कहा है कि यह तेल के लिए है।"

थरूर ने यह भी बताया कि अमेरिका ने जिस एकमात्र क्षेत्र पर नियंत्रण की कोशिश की है, वह वेनेजुएला का तेल उद्योग है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह बदलाव वहां की जनता के लिए है या फिर अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए? थरूर ने कहा कि हमें इसके परिणामों का इंतजार करना होगा कि आगे क्या होता है।

नोबेल पुरस्कार को लेकर भी उठाए सवाल

थरूर ने वेनेजुएला की लोकतंत्र कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो के उस कदम पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने अपना शांति पदक राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपा था। थरूर ने इसे एक ‘अप्रत्यक्ष लेन-देन’ बताया। उन्होंने कहा कि मचाडो व्हाइट हाउस में थीं और उन्होंने श्रद्धांजलि के रूप में यह पदक ट्रंप को दिया। हालांकि, थरूर ने इस पूरे लेन-देन में अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाई और कहा कि मचाडो के बयानों से यह संकेत मिलता है कि वह ट्रंप की नीतियों का पूरी तरह समर्थन नहीं करतीं। थरूर ने वेनेजुएला के इस पूरे घटनाक्रम को अभूतपूर्व बताया है।


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