जम्मू और कश्मीर में MBBS प्रवेश संकट: BOPEE ने नई काउंसलिंग से किया इनकार, सुपरन्यूमरी सीटों पर फंसा पेंच!
जम्मू और कश्मीर व्यावसायिक प्रवेश परीक्षा बोर्र्ड (BOPEE) ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने MBBS प्रवेश के लिए नई काउंसलिंग आयोजित करने में अपनी असमर्थता जाहिर की है। बोर्ड का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर सरकार के अधीन है।
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जम्मू और कश्मीर व्यावसायिक प्रवेश परीक्षा बोर्ड (BOPEE) ने एक अहम जानकारी साझा की है। BOPEE ने जम्मू और कश्मीर के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि वह वर्ष 2025-26 के लिए MBBS प्रवेश काउंसलिंग आयोजित नहीं कर सकता। बोर्र्ड ने अपने बयान में यह भी कहा कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में पहले से प्रवेश ले चुके छात्रों के लिए सुपरन्यूमररी (अतिरिक्त) सीटों का आवंटन सरकार के स्तर पर ही किया जाना चाहिए।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुा जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने न्यूनतम मानकों का पालन न करने के कारण SMVDIME की मान्यता रद्द कर दी। इसके बाद वहां पढ़ रहे 50 छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। हालांकि, जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होगी और उन्हें अन्य कॉलेजों में ‘सुपरन्यूमरी’ सीटों के जरिए समायोजित किया जाएगा।
लेकिन BOPEE ने अब साफ कर दिया है कि सुपरन्यूमरी सीटों का निर्माण और आवंटन उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। बोर्ड ने सिफारिश की है कि इन सीटों का आवंटन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और संबंधित मेडिकल कॉलेजों के परामर्श से सरकारी स्तर पर किया जाए। BOPEE ने यह भी बताया कि MCC पोर्टल पर 31 दिसंबर, 2025 तक 1,410 MBBS उम्मीदवारों का डेटा अपडेट किया गया था, जिसमें SMVDIME के 50 छात्र भी शामिल हैं।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छाड़ी हुई है। संघर्ष समिति (जो भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों का गठबंधन है) नवंबर 2024 से जम्मू में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है। समिति SMVDIME में प्रवेश रद्द करने की मांग कर रही है और चाहती है कि सीटें केवल उन्हीं छात्रों के लिए आरक्षित हों जो माता वैष्णो देवी का अनुसरण करते हैं। SMVDIME के पहले बैच में कश्मीर के 42 मुस्लिम, जम्मू के 7 हिंदू और एक सिख छात्र शामिल थे। यह जातीय संरचना अब विवाद का केंद्र बन गई है।
अब सवाल यह है कि जहाँ BOPEE ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं और सरकार ने ठोस प्रबंध का दावा किया है, वहीं छात्रों का भविष्य किसकी जिम्मेदारी है? क्या छात्रों को समय रहते दूसरे कॉलेजों में जगह मिल पाएगी या उनका एक साल बर्बाद हो जाएगा? इस संकट का पटाक्षेप कब और कैसे होगा, यह देखना बाकी है।
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आर्टिकल में दी गई सूचना सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। बॉलीवुड लाइफ किसी भी तरह की विश्वसनीयता का दावा नहीं करता है। किसी भी जानकारी के इस्तेमाल से पहले संबंधित विभाग से पुष्टि अवश्य कर लें।
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