कर्नाटक में सत्ता का खेल: सिद्धारमैया-शिवकुमार की ‘एकजुटता’ पर भाजपा का कटाक्ष
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उनके और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर कोई मतभेद हैं। सिद्धारमैया ने ज़ोर देकर कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंध मजबूत हैं और किसी भी तरह की दरार की बात झूठी है। वहीं, डीके शिवकुमार ने कांग्रेस की राज्य इकाई में पूर्ण एकता का विश्वास दिलाया और कहा कि वे पार्टी आलाकमान के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि कांग्रेस में किसी भी तरह की गुटबाज़ी नहीं है।
भाजपा का तीखा वार: ‘ब्रेकअप पर मेकअप’ मीटिंग?
हालांकि, कांग्रेस के इन दावों पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुलाकात को “ब्रेकअप मीटिंग और ‘ब्रेकअप पर मेकअप’ मीटिंग” करार दिया। उनका कहना है कि वे “मेकअप और एकता के नाश्ते” से अपने कथित ब्रेकअप को ठीक करने की कोशिश कर रहे थे। पूनावाला ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि INC का मतलब है ‘मुझे कन्फ़्यूज़न देखना है।’ उन्होंने कांग्रेस के नेताओं के विरोधाभासी बयानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि जहां एक ओर सिद्धारमैया किसी मुद्दे से इनकार कर रहे हैं, वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि ठीक करने के लिए कई मुद्दे हैं। जी परमेश्वर के मुख्यमंत्री बनने की संभावना और वीरप्पा मोइली के नेतृत्व पर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए पूनावाला ने कहा कि यह सब “झूठ” था।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि उन्होंने इन दोनों नेताओं के बीच “ट्वीट वॉर” भी देखा है और आज, वे अपनी एकता के प्रदर्शन के लिए “सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सहायक अभिनेता” के पुरस्कार के हकदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नाश्ते की मेज़ पर कर्नाटक के लोग नहीं थे, बल्कि यह सिर्फ़ राजनीति की बात थी, लोगों की नहीं। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक की जनता अब समझ गई है कि राहुल गांधी और सिद्धारमैया के झूठे वादों पर विश्वास करना और भाजपा सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार का शिकार होना कितनी बड़ी भूल थी।
मुख्यमंत्री पद का घमासान: पांच-पांच साल का फॉर्मूला?
यह पहली बार नहीं है जब सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनाव की खबरें आई हैं। माना जा रहा है कि 2023 के कर्नाटक चुनावों के दौरान कांग्रेस ने एक फॉर्मूले पर विचार किया था जिसके तहत दोनों नेता पांच-पांच साल का कार्यकाल बांटकर मुख्यमंत्री पद साझा कर सकें। चूंकि सिद्धारमैया अब अपने कार्यकाल का आधा समय पूरा कर चुके हैं, ऐसे में शिवकुमार के खेमे से यह मांग ज़ोर पकड़ने लगी है कि उन्हें शेष अवधि के लिए शीर्ष पद सौंपा जाना चाहिए।
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