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दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही की ‘असलियत’ आई सामने! फॉरेंसिक जांच में खुलासा: ऑडियो-वीडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के कथित बयानों को लेकर चल रहा विवाद अब तक के अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉरेंसिक जांच से यह साबित हो गया है कि सदन की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग में किसी भी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इस खुलासे के साथ ही स्पीकर ने पंजाब में शुरू की गई समानांतर और संदिग्ध फॉरेंसिक कार्रवाइयों की पोल खोलने की ठान ली है। उन्होंने ऐलान किया कि वह इस पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का निर्देश देंगे।
दावे के साथ सामने आई रिपोर्ट
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने मीडिया के सामने दिल्ली विधानसभा द्वारा गठित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट रखी। इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कार्यवाही का शब्दशः रिकॉर्ड (ट्रांसक्रिप्ट) ऑडियो-वीडियो फुटेज से पूरी तरह मेल खाता है।
गुप्ता ने बताया, "हमारी जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि एफएसएल को ऑडियो या वीडियो में किसी भी तरह की हेरफेर, छेड़छाड़ या परिवर्तन नहीं मिला है। रिकॉर्डिंग हर तरह से मूल और अक्षुण्ण है।" इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिसमें कार्यवाही के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की बात कही जा रही थी।
विपक्ष के आरोपों के बाद सर्वसम्मति से लिया गया था फैसला
स्पीकर ने यह भी स्पष्ट किया कि जब विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया, तो सदन ने सर्वसम्मति से इस रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने का फैसला किया था। इसी प्रस्ताव के तहत सभी संबंधित सामग्री एफएसएल को सौंपी गई थी, जहां स्थापित प्रक्रियाओं और कानूनी मानकों के अनुसार फ्रेम-दर-फ्रेम विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।
पंजाब में समानांतर जांच पर उठाए सवाल
हालांकि, विजेंद्र गुप्ता ने बाद के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि जब विधानसभा द्वारा अधिकृत फोरेंसिक प्रक्रिया चल रही थी, ठीक उसी दौरान पंजाब में समानांतर जांच की गई। उन्होंने बताया कि पंजाब में फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट और उसके बाद दर्ज हुई एफआईआर से औचित्य, इरादे और उचित प्रक्रिया के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
जालंधर अदालत के आदेश पर तंज
स्पीकर ने जालंधर की एक अदालत द्वारा पारित आदेश को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अंतरिम आदेश था, न कि तथ्यों या दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला। गुप्ता ने कहा कि यह आदेश एक फोरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित था, जिसकी प्रक्रिया, मापदंड और अभिरक्षा श्रृंखला (Custody Chain) की जांच और परीक्षण नहीं किया गया था।
इस मामले पर प्राकृतिक न्याय के मुद्दे उठाते हुए गुप्ता ने कई अहम सवाल दागे। उन्होंने कहा, "पंजाब में फोरेंसिक जांच किसने की? राज्य प्रयोगशाला किसके अधिकार क्षेत्र में काम कर रही थी और क्या यह पंजाब सरकार के नियंत्रण में थी?"
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब की समानांतर जांच में वीडियो के स्रोत, इस्तेमाल किए गए उपकरण, ज़ब्ती के तरीके और अभिरक्षा श्रृंखला के रखरखाव सहित महत्वपूर्ण विवरणों पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे में, इस समानांतर प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं और "एक अंतरिम आदेश को फैसला नहीं माना जा सकता और न ही इसे राजनीतिक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।"
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