युद्ध का नया चेहरा: अब आमने-सामने की जंग नहीं, दिमाग और नैतिकता की लड़ाई!
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने युद्ध के बदलते स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा है कि आज की लड़ाई अब पारंपरिक “आमने-सामने” की नहीं रह गई है, बल्कि यह “गैर-गतिज और गैर-संपर्क” प्रकृति की हो गई है। ऐसे में, इस नई चुनौती का सामना करने के लिए हमें सैन्य शक्ति के साथ-साथ बौद्धिक कौशल और नैतिक तैयारी पर भी ज़ोर देना होगा।
लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में युवाओं से आह्वान किया कि वे थिंक टैंक, प्रयोगशालाओं और युद्धक्षेत्र जैसे विभिन्न मोर्चों पर अपनी भूमिका निभाएं।
बदलती युद्धनीति: दिमाग की जंग, न कि सिर्फ़ तलवार की
केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू भी ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग: यंग लीडर्स फोरम’ में सेना और रक्षा थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज’ द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, छात्रों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच मौजूद थे।
सेना प्रमुख ने अपने भाषण में विशेष रूप से युद्ध की इस उभरती हुई प्रकृति और इसके लिए आवश्यक तैयारियों पर गहनता से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “युद्ध में भाग-दौड़ अब नहीं होती और यह संपर्क-रहित होता जा रहा है।” इस परिप्रेक्ष्य में, उन्होंने ज़ोर दिया कि प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए “सैन्य शक्ति, बौद्धिक कौशल और न्यायसंगत तैयारी” का त्रय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर, ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग में चर्चा का हिस्सा रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम के अंत में, यह घोषणा की गई कि “सुधार से परिवर्तन: सशक्त और सुरक्षित भारत” विषय के साथ चाणक्य रक्षा संवाद 2025 का आयोजन नवंबर (27-28) में किया जाएगा।
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