सरदार पटेल की जयंती पर कांग्रेस का बीजेपी-आरएसएस पर तीखा प्रहार: “विरासत पर डाका डालने की कोशिश”
नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक ट्वीट के माध्यम से दोनों संगठनों पर “महापुरुषों की विरासत को अपने हित में इस्तेमाल करने” का आरोप लगाया है, खासकर उस विचारधारा का जिक्र करते हुए जिसका आजादी की लड़ाई और संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं था।
जयराम रमेश का ‘एक्स’ पर वार
जयराम रमेश ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “आज जब राष्ट्र सरदार पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है, तब हमें यह भी याद करना चाहिए कि 13 फ़रवरी 1949 को जवाहरलाल नेहरू ने गोधरा में सरदार पटेल की एक प्रतिमा का अनावरण किया था। गोधरा से ही भारत के लौह पुरुष ने अपनी वकालत शुरू की थी।” उन्होंने आगे कहा कि उस अवसर पर पंडित नेहरू का दिया गया भाषण बार-बार पढ़ा जाना चाहिए, क्योंकि उससे दोनों नेताओं की तीन दशकों से भी अधिक समय तक चली गहरी और मजबूत सहयात्रा की जानकारी मिलती है।
नेहरू और पटेल की अटूट मित्रता का स्मरण
रमेश ने पंडित नेहरू के एक भावुक संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सरदार पटेल की 75वीं जयंती की पूर्व संध्या पर कहा था: “बहुत कम लोगों के पास सरदार पटेल जैसा इतना लंबा और उल्लेखनीय सेवा-कार्य का इतिहास है।” नेहरू ने यह भी याद किया कि उन्होंने राष्ट्रीय गतिविधियों में पटेल के साथ तीस वर्षों की मित्रता और घनिष्ठ सहयोग को संजोया है, जो उतार-चढ़ाव और बड़े घटनाक्रमों से भरा रहा। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल इन परीक्षाओं से निकलकर भारतीय परिदृश्य पर एक प्रभावशाली और मार्गदर्शक व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं, और ईश्वर से उनकी दीर्घायु की कामना की।
‘भारत की एकता के शिल्पकार’ – नेहरू के शब्द, पटेल की पहचान
जयराम रमेश ने 19 सितंबर 1963 को नई दिल्ली में संसद भवन और चुनाव आयोग के कार्यालय के पास स्थित एक प्रमुख चौराहे पर सरदार पटेल की प्रतिमा के अनावरण का भी स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि उस समय जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे, और प्रतिमा पर अंकित होने वाले शिलालेख के लिए उन्होंने स्वयं यह वाक्य चुना था: “भारत की एकता के शिल्पकार।”
इंदिरा गांधी की पटेल को श्रद्धांजलि
कांग्रेस नेता ने यह भी रेखांकित किया कि 31 अक्टूबर 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सरदार वल्लभभाई पटेल जन्म शताब्दी वर्ष के समापन समारोह की अध्यक्षता की थी। उस अवसर पर इंदिरा गांधी ने सरदार पटेल के अनेक विशिष्ट कार्यों और योगदानों को रेखांकित करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की थी, जिसका महत्व आज भी बरकरार है।
“इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया है”
रमेश ने सरदार पटेल द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए एक पत्र की प्रति साझा करते हुए कहा, “2014 के बाद, इतिहास को विशेष रूप से ‘जी 2’ और उनके तंत्र द्वारा खुलेआम तोड़ा-मरोड़ा और विकृत किया गया है। निस्वार्थ राष्ट्र-निर्माताओं के इन महान व्यक्तित्वों को उस विचारधारा द्वारा अपने हित में इस्तेमाल करना, निश्चय ही उन्हें (पटेल) व्यथित करता।”
“संविधान निर्माण और आजादी की लड़ाई से बाहर रही विचारधारा”
उन्होंने दावा किया, “यह एक ऐसी विचारधारा है जिसका न तो स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान था, न संविधान निर्माण में, और जिसने, स्वयं सरदार पटेल के शब्दों में, ऐसा माहौल बनाया जिसने 30 जनवरी, 1948 (महात्मा गांधी की हत्या) की भीषण त्रासदी को संभव बनाया।” कांग्रेस का यह तीखा हमला पटेल की जयंती पर बीजेपी और आरएसएस की नीतियों और विचारधारा पर एक कड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
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