पंजाब में SIR के दौरान राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम सूची अक्टूबर में प्रकाशित होनी है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव
पंजाब में चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) अभियान के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम 13 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं मिला। उनके नाम के सामने ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ (Permanently Shifted) दर्ज किया गया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चड्ढा पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है।
20.66 लाख नाम हटाए गए
SIR के तहत पंजाब की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है। अब तक करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। यह अभियान शुरू होने से पहले राज्य में दर्ज कुल मतदाताओं का लगभग 9.7 प्रतिशत बताया जा रहा है। नाम हटने के पीछे अलग-अलग कारण दर्ज किए गए हैं, जिनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित होना भी शामिल है।
12 सितंबर तक दावा और आपत्ति
ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं के नाम हटे हैं, वे 12 सितंबर 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए दोबारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं। यानी चड्ढा के पास भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम बहाल कराने का रास्ता खुला है।
The AAP government in Punjab has now taken its politics of revenge to the Draft Electoral Rolls.
I am a sitting Rajya Sabha MP from Punjab, with my voter ID registered in Mohali, Punjab. Yet my name has been classified as “shifted” in the draft electoral rolls.
Thankfully,… pic.twitter.com/laAFAAWYiQ
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) September 3, 2026
चड्ढा ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
नाम हटाए जाने पर चड्ढा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे सामान्य प्रशासनिक गलती मानने से इनकार किया। उनका आरोप है कि यह राजनीतिक बदले की भावना से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि वह SIR के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं और अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होनी है।
SIR की गाइडलाइन का दिया हवाला
चड्ढा ने SIR की विस्तृत गाइडलाइन के पैराग्राफ 4(d) का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि इसमें जन-प्रतिनिधियों समेत कुछ विशिष्ट वर्गों के लोगों को पहले से चिह्नित करने और ड्राफ्ट सूची में शामिल रखने की व्यवस्था बताई गई है, ताकि दावे-आपत्तियों के दौरान जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा सांसद होने के बावजूद उनका नाम इस व्यवस्था के तहत क्यों नहीं रखा गया।
AAP पर दबाव का आरोप, सियासत तेज
चड्ढा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि BLO से लेकर चुनावी प्रक्रिया में शामिल कई अधिकारी राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे से जुड़े हैं और सरकार के पास उनके स्थानांतरण व पोस्टिंग जैसे मामलों में प्रभाव होता है। हालांकि ये चड्ढा के राजनीतिक आरोप हैं। अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ी है।
अंतिम सूची बताएगी तस्वीर
फिलहाल यह विवाद ड्राफ्ट सूची तक सीमित है। दावा और आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि राघव चड्ढा समेत हटाए गए कितने नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल होते हैं। SIR जैसे बड़े अभियान में पारदर्शिता और हर पात्र मतदाता के अधिकार की सुरक्षा सबसे अहम है। अंतिम सूची आने तक यह मामला पंजाब की राजनीति में सवालों और आरोपों के केंद्र में बना रहेगा।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
