मोदी-पुतिन की अहम बैठक में तेल से रक्षा तक कई बड़े मुद्दे, Su-57 और S-400 पर टिकी नजरें

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और निवेश से जुड़े कई मुद्दे इस बैठक को खास बना रहे हैं।

11 सितंबर की मुलाकात पर टिकी निगाहें

व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। हालांकि, उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और रक्षा से जुड़े समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

बैठक में क्रूड ऑयल, व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। कुछ बड़े रक्षा समझौतों और घोषणाओं को लेकर भी खास उम्मीदें हैं।

क्रूड ऑयल से आगे बढ़ेगा आर्थिक रिश्ता?

भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूस से मिलने वाला कच्चा तेल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव भी बढ़ा है।

भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि तेल खरीद से जुड़े फैसले उसकी जरूरत और राष्ट्रीय हित के आधार पर होंगे। ऐसे में मोदी-पुतिन बैठक में दोनों देश आर्थिक रिश्तों को सिर्फ क्रूड ऑयल तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं।

सुखोई-57 डील पर टिकी बड़ी उम्मीद

रक्षा क्षेत्र बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण हो सकता है। भारत और रूस के बीच 75 सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट की संभावित डील पर नजर है। यह पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है और संभावित सौदे की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये तक बताई गई है।

इसके साथ ही संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर भी बड़ी घोषणा संभव है। भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर जोर देता रहा है।

S-400 की पांचवीं यूनिट का मुद्दा

भारत और रूस के बीच S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सप्लाई भी बैठक के एजेंडे में रह सकती है। दोनों देशों ने करीब 5.43 अरब डॉलर में पांच सिस्टम का समझौता किया था। इनमें चार यूनिट भारत पहुंच चुकी हैं, जबकि पांचवीं की सप्लाई बाकी है।

मोदी और पुतिन इस लंबित सप्लाई को पूरा करने की दिशा में भी चर्चा कर सकते हैं।

परमाणु पनडुब्बी सहयोग पर भी नजर

रक्षा सहयोग केवल लड़ाकू विमानों और मिसाइल सिस्टम तक सीमित नहीं है। भारत और रूस के बीच परमाणु पनडुब्बी से जुड़े सहयोग पर भी बातचीत जारी है।

भारत रूस से परमाणु पनडुब्बी के लिए 112 मेगावाट क्षमता वाले अधिक शक्तिशाली रिएक्टर की तकनीक चाहता है। ऐसे में यह मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में अहम स्थान पा सकता है।

रिश्तों की अगली दिशा तय कर सकती है बैठक

मोदी-पुतिन मुलाकात सिर्फ पुराने रिश्तों की समीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी का संकेत भी दे सकती है। ऊर्जा से लेकर रक्षा और व्यापार तक कई मोर्चों पर दोनों देशों के हित जुड़े हैं।

अब निगाह इस बात पर है कि 11 सितंबर की बातचीत से कौन से ठोस फैसले सामने आते हैं। अगर रक्षा उत्पादन, ऊर्जा और व्यापार में नए समझौते आगे बढ़ते हैं, तो यह बैठक भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण की मजबूत शुरुआत साबित हो सकती है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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