BCI पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बड़े नीतिगत फैसलों पर लगी रोक; 5 हफ्ते में होगा चुनाव

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के लंबे समय से चल रहे नेतृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्यवस्था दी है। नई निर्वाचित कमेटी बनने तक BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा सिर्फ रोजमर्रा के काम देख सकेंगे। बड़े नीतिगत फैसलों के लिए अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति जरूरी होगी।

मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे समय से चले आ रहे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव हो चुके हैं और अब वहां से चुने गए प्रतिनिधि BCI की नई कमेटी के गठन का रास्ता साफ करेंगे।

प्रो-टेम चेयरमैन के तौर पर काम करेंगे मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि नई निर्वाचित बॉडी के अस्तित्व में आने तक मनन कुमार मिश्रा प्रो-टेम चेयरमैन के तौर पर काम करेंगे। वह BCI की रोजमर्रा की प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं, लेकिन बड़े नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे।

जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि मिश्रा को नए कार्यकाल के लिए लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुना गया है। इसलिए नई निर्वाचित संस्था बनने तक उनकी भूमिका सीमित रहेगी।

अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भूमिका अहम

कोर्ट ने व्यवस्था दी कि बड़े नीतिगत फैसलों के लिए अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी और सहमति जरूरी होगी। दोनों वरिष्ठ लॉ ऑफिसर BCI के पदेन सदस्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, नई कमेटी बनने तक दोनों को BCI के कामकाज में कुछ समय के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे संगठन के बड़े फैसलों पर निगरानी बनी रहेगी।

2030 तक कार्यकाल बढ़ाने पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि BCI नियम 12(2) के तहत चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। इसके बावजूद अप्रैल 2025 की अधिसूचना के जरिए मनन कुमार मिश्रा का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक बढ़ा दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि मिश्रा एक ट्रस्ट बनाकर BCI की संपत्तियों को उसमें ट्रांसफर कर रहे हैं। हालांकि BCI की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने इन आरोपों का जोरदार विरोध किया।

चेयरमैन हटाने के बजाय चुनाव पर जोर

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान, गोपाल शंकरनारायण और सी.यू. सिंह ने तुरंत नई कमेटी नियुक्त करने की मांग की। वहीं BCI की ओर से मनिंदर सिंह और डी.एस. नायडू ने आरोपों को खारिज किया।

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेयरमैन को हटाने का आदेश देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने इसके बजाय BCI के चुनाव की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।

5 हफ्ते में पूरी होगी चुनाव प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और BCI चुनाव को लेकर समयसीमा तय की है। सभी राज्य बार काउंसिलों में चुनाव हो चुके हैं, जबकि दो महिला सदस्यों का मनोनयन बाकी है।

हर राज्य के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दो सप्ताह के भीतर महिला सदस्यों का मनोनयन करना होगा। इसके एक सप्ताह के भीतर स्टेट बार काउंसिल के गठन की अधिसूचना जारी करनी होगी।

इसके बाद तीन सप्ताह के भीतर स्टेट बार काउंसिल अपने चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करेगी। साथ ही BCI में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य का भी चुनाव होगा।

17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

पूरी प्रक्रिया के बाद राज्य बार काउंसिलों के प्रतिनिधि मिलकर BCI की नई कमेटी और उसके पदाधिकारियों के चुनाव का रास्ता साफ करेंगे। कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक करीब पांच सप्ताह में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को तय की है। उस दिन कोर्ट यह देखेगा कि उसके निर्देशों का पालन करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

BCI के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चुनाव प्रक्रिया को समाधान का रास्ता बनाया है। नई निर्वाचित कमेटी बनने तक बड़े नीतिगत फैसलों पर नियंत्रण रहेगा और अटॉर्नी जनरल तथा सॉलिसिटर जनरल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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