ज़हरीली दवा का कहर: 20 बच्चों की बलि, दवा कंपनी का परमानेंट लाइसेंस रद्द

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
"ज़हरीली दवा का कहर: 20 बच्चों की बलि, दवा कंपनी का परमानेंट लाइसेंस रद्द"
कातिल कफ सिरप से 20 बच्चों की मौत: फार्मा कंपनी पर गिरी गाज, लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द

खतरनाक कफ सिरप का पर्दाफाश: 20 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु में कंपनी का लाइसेंस निलंबित, सख्त कार्रवाई की तैयारी

मध्य प्रदेश में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप की वजह से 20 मासूमों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य बच्चे अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इस गंभीर मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने गुरुवार को घोषणा की है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गहन जांच के बाद, दो दिनों के भीतर इस लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा।

एएनआई से बातचीत में, सुब्रमण्यम ने बताया कि फिलहाल कंपनी का लाइसेंस अस्थायी रूप से होल्ड पर रखा गया है। आगे की जांच और निरीक्षणों के निष्कर्षों के आधार पर, यह निर्णय अंतिम रूप दिया जाएगा।

छिंदवाड़ा से चेन्नई तक जांच का जाल: मालिक की गिरफ्तारी की कोशिशें तेज

इस बीच, छिंदवाड़ा पुलिस की टीमें सक्रिय हो गई हैं। छिंदवाड़ा एसपी के अनुसार, कंपनी के मालिक रंगनाथन को चेन्नई की अदालत में पेश किया जाएगा। ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद, उन्हें छिंदवाड़ा लाया जाएगा, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।

यह दुखद घटना मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्ना जिलों में हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बुधवार को बताया कि कुल 20 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 17 छिंदवाड़ा जिले के, दो बैतूल जिले के और एक पांढुर्ना जिले का था। उन्होंने बताया कि पांच बच्चों का इलाज जारी है। शुक्ला ने इस मामले में राज्य सरकार के कड़े रुख को दोहराया और कहा कि पुलिस की टीमें कंपनी के मालिक को गिरफ्तार करने के लिए चेन्नई और कांचीपुरम तक पहुंच गई हैं, और मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टरों का विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई

इस मामले ने एक और चिंताजनक पहलू को उजागर किया है। छिंदवाड़ा में डॉक्टरों के एक समूह और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि सरकारी डॉक्टर प्रवीण सोनी को रिहा किया जाए, जिन्हें हाल ही में कथित तौर पर इस कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में जेल भेजा गया था। डॉ. सोनी, जो छिंदवाड़ा के परासिया स्थित सिविल अस्पताल में सरकारी शिशु रोग विशेषज्ञ हैं, को पहले निलंबित किया गया था और बाद में उन पर कानूनी कार्रवाई हुई, जिसके चलते उन्हें सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस घटना की गंभीरता को समझते हुए, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद, दो औषधि निरीक्षकों, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप निदेशक को निलंबित करने और एक औषधि नियंत्रक के स्थानांतरण का आदेश दिया गया।

यह पूरा मामला औषधि सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है, और उम्मीद है कि आगे की जांच में सभी दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और ऐसी दुखद घटनाएं भविष्य में दोबारा नहीं होंगी।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *