बिहार में महंगा होगा सफर! 47 पुलों और 55 स्टेट हाईवे पर टोल की तैयारी, FASTag से कटेगा पैसा

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
6 Min Read
Travel to get costlier in Bihar! Preparations underway to levy

बिहार में सड़क से सफर करने वाले व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए आने वाले दिनों में परिवहन महंगा हो सकता है। राज्य सरकार 47 प्रमुख पुलों और 55 स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था तैयार कर रही है। प्रस्तावित प्रणाली में FASTag और डिजिटल भुगतान की मदद से शुल्क वसूला जाएगा। हालांकि, इसकी लागू होने की तारीख और अंतिम शुल्क दरों को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

बिहार में 47 पुलों और 55 हाईवे पर टोल की तैयारी

बिहार में राज्य के प्रमुख पुलों और सड़कों से गुजरने वाले व्यावसायिक वाहनों पर टोल लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 पुलों और 55 स्टेट हाईवे को चिह्नित किया गया है।

सरकार का उद्देश्य चयनित मार्गों पर व्यवस्थित तरीके से शुल्क वसूली करना है। इसके लिए टोल प्लाजा स्थापित करने, तकनीकी निगरानी और संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है। योजना लागू होने के बाद ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों के परिचालन खर्च पर इसका असर पड़ सकता है।

राजस्थान मॉडल का अध्ययन कर रही सरकार

बिहार में टोल वसूली की व्यवस्था तैयार करने के लिए अधिकारियों ने राजस्थान के मॉडल का अध्ययन किया है। सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में राजस्थान गए अधिकारियों ने वहां टोल प्लाजा के संचालन, तकनीकी माध्यम से शुल्क संग्रह और कम खर्च में व्यवस्था चलाने के तरीकों को समझने की कोशिश की।

इस अध्ययन में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पथ निर्माण विभाग और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े अधिकारी शामिल थे। सरकार के सामने ऐसी प्रणाली तैयार करने की चुनौती है, जिसमें टोल वसूली प्रभावी हो और संचालन व रखरखाव पर होने वाला खर्च भी नियंत्रित रहे।

FASTag से होगा टोल कलेक्शन

प्रस्तावित व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए FASTag और डिजिटल भुगतान तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की जरूरत कम करने और शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित करने की तैयारी है। कुछ वाहनों को छूट देने का प्रावधान भी प्रस्तावित व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि, किन वाहनों को कितनी छूट मिलेगी और किस श्रेणी पर कितना शुल्क लगेगा, इसकी अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होगी।

टोल व्यवस्था के लिए 30.94 करोड़ रुपये मंजूर

दी गई जानकारी के अनुसार, 2 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में टोल वसूली प्रणाली, निगरानी व्यवस्था, शुल्क निर्धारण और परामर्श सेवाओं के लिए 30 करोड़ 94 लाख 71 हजार 500 रुपये की स्वीकृति दी गई।

इस राशि का प्रावधान नई व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। टोल प्लाजा की स्थापना से लेकर तकनीकी निगरानी तक कई स्तरों पर काम किया जाना है। व्यवस्था कब से शुरू होगी और किन मार्गों पर पहले शुल्क वसूली होगी, इसकी जानकारी लागू करने से संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद सामने आएगी।

ट्रक और बस से माल ढुलाई हो सकती है महंगी

टोल वसूली लागू होने पर व्यावसायिक वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ सकता है। ट्रक और मालवाहक वाहनों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा, तो माल ढुलाई की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसका प्रभाव कारोबारियों और परिवहन कंपनियों के खर्च पर पड़ सकता है।

बसों और अन्य व्यावसायिक सवारी वाहनों के लिए भी टोल शुल्क अतिरिक्त लागत पैदा कर सकता है। इसका यात्रियों के किराये पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित शुल्क दरों और परिवहन संचालकों की नीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल किराया बढ़ने को निश्चित मानना जल्दबाजी होगी।

निजी कार और बाइक चालकों को मिलेगी राहत?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, योजना में निजी कार और बाइक जैसे गैर-व्यावसायिक वाहनों को शुल्क से मुक्त रखने की बात कही गई है। यदि यह प्रावधान अंतिम व्यवस्था में शामिल रहता है, तो निजी वाहन चालकों पर सीधे टोल का बोझ नहीं पड़ेगा।

हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर वाहन चालकों की नजर तीन बातों पर रहेगी—टोल की अंतिम दरें, छूट के नियम और लागू होने की तारीख। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार के किन मार्गों पर किस तरह शुल्क वसूला जाएगा।

बिहार में परिवहन व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार सरकार की यह पहल सड़क और पुलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क आधारित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। सरकार के लिए चुनौती राजस्व संग्रह, सड़क सुविधाओं के रखरखाव और वाहन चालकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च के बीच संतुलन बनाने की होगी।

फिलहाल 47 पुलों और 55 स्टेट हाईवे पर प्रस्तावित टोल व्यवस्था की अंतिम दरों और शुरुआत की तारीख का इंतजार है। इन विवरणों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि व्यावसायिक परिवहन की लागत कितनी बढ़ेगी और वाहन चालकों को किन नियमों का पालन करना होगा।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *