ग्रीनलैंड पर ट्रंप की ‘आर-पार’ की जंग: नाटो चीफ को दो टूक, कहा- अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं!
ग्रीनलैंड: ग्रीनलैंड को हासिल करने की डोनाल्ड ट्रंप की जिद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति का इस द्वीप के प्रति रवैया हर बीतते दिन के साथ और भी सख्त होता जा रहा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो (NATO) के मुखिया मार्क रूटे से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसमें ग्रीनलैंड का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में अमेरिका के कदम अब पीछे नहीं खींचेंगे। साथ ही, उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की बैठक में विभिन्न देशों के नेताओं से इस पर चर्चा करने का भी संकेत दिया।
इस महत्वपूर्ण फोन कॉल के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मार्क रूटे के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही और दोनों दावोस में मिलने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि उनके इस रुख पर व्यापक सहमति है और समझौते से पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं है।
ट्रंप ने एक बार फिर अपनी पुरानी विचारधारा को दोहराते हुए कहा कि "शांति केवल ताकत के दम पर ही संभव है।" उन्होंने दावा किया कि आज अमेरिका दुनिया की सर्वोच्च शक्ति है क्योंकि उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में सेना को जो मजबूती दी थी, वह काम अब दोगुनी रफ्तार से जारी है। ट्रंप का मानना है कि केवल अमेरिका ही वैश्विक शांति का रक्षक बन सकता है और इसके लिए सैन्य और रणनीतिक ताकत अनिवार्य है। दावोस में वैश्विक नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों में भी ग्रीनलैंड का एजेंडा प्रमुखता से रहने वाला है।
हवाई सैन्य घेराबंदी: ग्रीनलैंड बेस पर पहुंचा अमेरिकी विमान
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के कड़े रुख ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, अब सैन्य गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। अमेरिका ने ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर ‘नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड’ (NORAD) का एक विमान तैनात कर दिया है। हालांकि, NORAD ने सफाई दी है कि यह विमान पूर्व निर्धारित गतिविधियों का हिस्सा है और यह फैसला डेनमार्क व ग्रीनलैंड की सरकारों को भरोसे में लेकर किया गया है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आर्थिक प्रहार: टैरिफ और ट्रेड वॉर की चेतावनी
ट्रंप केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, तो डेनमार्क और ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाया जाएगा। ट्रंप का तर्क है कि चीन और रूस की इस क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए ग्रीनलैंड का अमेरिका के पास होना सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है।
उन्होंने स्पष्ट डेडलाइन देते हुए कहा कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो 1 फरवरी 2026 से 10 प्रतिशत और यदि फिर भी समाधान नहीं निकला, तो 1 जून 2026 से टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रंप ने भावनात्मक कार्ड खेलते हुए कहा कि अमेरिका ने दशकों तक डेनमार्क का साथ निभाया है और अब वक्त आ गया है कि डेनमार्क ‘कृतज्ञता’ दिखाते हुए ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंप दे।
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