पेपर लीक का भंवर: उत्तराखंड सरकार का एसआईटी गठन, सीएम की ‘नकल जिहादियों’ पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
उत्तराखंड में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है। परीक्षा में धांधली के आरोपों और छात्रों के प्रदर्शनों के बीच, राज्य सरकार ने बुधवार को इस गंभीर मामले की जांच के लिए एक विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह एसआईटी एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की निगरानी में काम करेगी, जो निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का आश्वासन देता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उनकी सरकार ‘नकल जिहादियों’ को मिट्टी में मिलाने तक चैन से नहीं बैठेगी। उन्होंने कोचिंग माफिया और नकल माफिया पर युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बनाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है।
पांच सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व देहरादून की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलूनी करेंगी। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एसआईटी की जांच का दायरा पूरे प्रदेश में होगा और यह एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। छात्रों का हित सर्वोपरि है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राज्य सरकार हरिद्वार स्थित संबंधित परीक्षा केंद्र के कक्ष निरीक्षकों, सुपरवाइजरों या किसी भी अन्य लापरवाह व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई करने का मन बना चुकी है। यूकेएसएसएससी से भी अनुरोध किया जाएगा कि जांच पूरी होने तक इस परीक्षा के संबंध में कोई आगे की कार्रवाई न करे।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र के तीन पन्नों के ‘स्क्रीनशॉट’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी खालिद मलिक और उसकी बहन साबिया को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, खालिद ने परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर अपनी बहन को भेजी, जिसने एक सहायक प्रोफेसर के माध्यम से उत्तर प्राप्त किए। हालांकि, जब उस प्रोफेसर को प्रश्नपत्र पर संदेह हुआ, तो उसने स्क्रीनशॉट साझा किए, जो अंततः सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गए।
मुख्यमंत्री धामी ने ‘नकल जिहाद’ के इस संगठित प्रयास की निंदा करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में सख्त नकल विरोधी कानून के लागू होने के बाद 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है, जो पिछली 21 सालों में मिली 16 हजार नौकरियों से कहीं अधिक है। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जिन्हें युवाओं का उनकी योग्यता के आधार पर चयन रास नहीं आ रहा है।
इस बीच, बेरोजगार संघ से जुड़े युवा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की है और शुक्रवार को इस संबंध में धरना देने का कार्यक्रम तय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा के निर्देशानुसार, 26 सितंबर को पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर धरने का आयोजन किया जाएगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा और सरकार पेपर लीक प्रकरण को ‘नकल जिहाद’ का नाम देकर मामले को भटकाने का प्रयास कर रही है।
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