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क्रिकेट
oi-Naveen Sharma
Published: Monday, January 19, 2026, 22:35 [IST]
IND vs NZ: 37 साल के लंबे इंतज़ार के बाद, न्यूजीलैंड ने आखिरकार भारत की धरती पर वनडे सीरीज़ जीतकर इतिहास रच दिया है। यह अप्रत्याशित परिणाम सिर्फ भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका ही नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की रणनीति और चयन नीतियों पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा गया है। घरेलू परिस्थितियों में जहां भारत को अजेय माना जाता रहा है, वहीं कीवी टीम ने तीखी नज़र से भारतीय कमजोरियों को पहचाना और सीरीज़ अपने नाम कर ली। इस हार ने भारतीय क्रिकेट के गलियारों में बदलाव की मांग को और तेज कर दिया है।
इस नाकामी के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल आलोचनाओं के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों तक, हर मंच पर टीम चयन, प्लेइंग कॉम्बिनेशन और खिलाड़ियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशंसकों का मानना है कि अब समय आ गया है कि टीम में सीनियरिटी या नाम के आधार पर नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ प्रदर्शन के पैमाने पर फैसले लिए जाएं; आलोचकों का मानना है कि तीन खिलाड़ियों को अब बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।
रवींद्र जडेजा
वनडे टीम में सबसे बड़ा सवाल रवींद्र जडेजा के भविष्य को लेकर खड़ा हुआ है। जडेजा का वनडे रिकॉर्ड लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। उन्होंने वनडे क्रिकेट में आखिरी अर्धशतक करीब 12 साल पहले लगाया था और न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज़ में वह बल्ले और गेंद-दोनों से ही नाकाम रहे। एक सीनियर ऑलराउंडर होने के बावजूद न तो उन्होंने मिडल ऑर्डर को संभाला और न ही अपनी गेंदबाजी से मैच का रुख बदला। ऐसे में उन्हें टीम से बाहर करने की मांग तेज होती जा रही है।
कुलदीप यादव
इनको लेकर भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। इतने साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बावजूद उनकी बल्लेबाजी में कोई खास सुधार नजर नहीं आता। निचले क्रम में उनसे कुछ योगदान की उम्मीद की जाती है, लेकिन वह पूरी तरह विफल रहे। गेंदबाजी में भी न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने उन्हें जमकर निशाना बनाया, जिससे रन रोकने और विकेट निकालने-दोनों में उनकी भूमिका सीमित नजर आई।
नीतीश रेड्डी
नीतीश ने जरूर सीरीज़ के आखिरी मुकाबले में अर्धशतक जड़कर बल्लेबाजी में अपनी काबिलियत दिखाई। उनकी पारी से यह संकेत मिला कि उनमें भविष्य की संभावनाएं हैं, लेकिन एक ऑलराउंडर के तौर पर गेंदबाजी में उनका प्रभाव बेहद सीमित रहा। वनडे फॉर्मेट में सिर्फ बल्लेबाजी के दम पर जगह बनाना मुश्किल होता है, खासकर तब जब टीम को एक संतुलित विकल्प की जरूरत हो।
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