
विराट रामायण मंदिर: बिहार के मोतिहारी में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग को ‘विराट रामायण मंदिर’ में पूरे विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया. इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण के साक्षी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित कई गणमान्य अतिथि बने. प्राण-प्रतिष्ठा और स्थापना से पूर्व, महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव आचार्य किशोर कुणाल और उनकी पुत्रवधू सांसद शांभवी चौधरी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की.
हर-हर महादेव के उद्घोष से गुंजायमान हुआ पूरा क्षेत्र
विराट रामायण मंदिर का कोना-कोना ‘सहस्त्र लिंगम’ की स्थापना के दौरान शिवभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया. हजारों की तादाद में उमड़े श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा. इस पावन अवसर पर सीएम नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने विधि-विधान से महादेव की आराधना की. इस खास पल में शिवलिंग का निर्माण करने वाले विनायक वेंकटरमन और उनकी माता हेमलता भी मौजूद रहीं, जिन्होंने इस विशाल संरचना को हकीकत में बदला है.
तमिलनाडु की कला और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना
यह भव्य शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम की धरती पर तैयार किया गया है. 33 फीट ऊंचे और 210 मीट्रिक टन वजनी इस महाकाय शिवलिंग की भव्यता देखते ही बनती है. इसकी बनावट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह भूकंपरोधी बनाया गया है, ताकि यह आगामी सैकड़ों वर्षों तक अपनी पूरी दिव्यता के साथ सुरक्षित खड़ा रह सके.
अवेयर मीडिया नेटवर्क
मोतिहारी के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में शिवलिंग स्थापना के बाद पूजा-अर्चना करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, आचार्य किशोर कुणाल, सांसद शांभवी चौधरी सहित अन्य नेता शामिल हुए. #Motihari #RamayanaTemple #Shivling #NitishKumar… pic.twitter.com/lzVU9Fbz8V
— Aware Media (@prabhatkhabar) January 17, 2026
एक ही विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर दी गई आकृति
शिवलिंग निर्माण कंपनी के विनायक वेंकटरमण ने बताया कि इस दिव्य कृति को तैयार करने में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसे एक ही विशालकाय ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है. 33 फीट की ऊंचाई और 210 मीट्रिक टन वजन वाले इस शिवलिंग को आकार देने में तमिलनाडु के महाबलीपुरम (पट्टीकाडु गांव) में शिल्पकारों को 10 साल का लंबा वक्त लगा. मुख्य शिल्पकार लोकनाथ और उनकी टीम की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि आज यह भव्य रूप सबके सामने है.
इस विशाल शिवलिंग को 21 नवंबर को महाबलीपुरम से सड़क मार्ग के जरिए बिहार के लिए रवाना किया गया था. यात्रा शुरू होने से पहले स्थानीय ग्रामीणों और शिल्पकारों ने बड़े ही भक्ति भाव से इसे विदा किया था.
स्थापना के लिए आज का दिन ही क्यों था खास?
आज 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी की विशेष तिथि है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि को शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और सर्वप्रथम भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा की गई थी. इस दिन का आध्यात्मिक महत्व महाशिवरात्रि के ही समान माना जाता है, यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के लिए इस विशेष दिन को चुना गया.
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