कैंसर: मन और तन की जंग में अपनों का साथ है अनमोल
कैंसर, एक ऐसा विकराल रोग जो न केवल शरीर को जकड़ लेता है, बल्कि मन की शांति भी छीन लेता है। खानपान की गलत आदतें, बदलती जीवनशैली, दम घोंटू वायु प्रदूषण और प्लास्टिक का बढ़ता बोलबाला, ये सब मिलकर इस जानलेवा बीमारी के कारणों में शुमार हैं। जब कोई व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त होता है, तो उसे शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ एक प्रचंड मानसिक संघर्ष से भी गुजरना पड़ता है। कीमोथेरेपी, रेडिएशन, लेजर उपचार और दवाओं के इस लंबे सफर में, पूरी तरह स्वस्थ होने में सालों का समय लग सकता है।
ऐसे नाजुक समय में, कैंसर के मरीजों के लिए सिर्फ इलाज, थेरेपी और दवाएं ही काफी नहीं हैं; उन्हें अपनों के अटूट सहारे की भी नितांत आवश्यकता होती है। लेकिन अक्सर, कैंसर से जूझ रहे प्रियजनों का मानसिक संबल बढ़ाने के मामले में, परिवार और दोस्त असमंजस में पड़ जाते हैं कि आखिर वो मरीज का मनोबल कैसे बढ़ाएं। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से, यह लेख आपको कैंसर के मरीजों का हौसला बढ़ाने के प्रभावी तरीके बताएगा।
कैंसर: अकेली लड़ाई नहीं, साथ मिलकर जीतें
चिकित्सकों के अनुसार, कैंसर के उपचार के दौरान मरीज को कई तरह की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कीमो और रेडिएशन थेरेपी के साइड इफेक्ट्स से उत्पन्न होने वाली घबराहट, ठीक न हो पाने का भय, भविष्य की अनिश्चितता और कभी-कभी जीवन से मोहभंग जैसी भावनाएं मरीज के दिलो-दिमाग पर हावी रहती हैं। इस दौर में, यदि दोस्त और परिवार वाले मरीज का हाथ थामकर यह विश्वास दिलाएं कि वे हर कदम पर उनके साथ हैं, तो यह भयावह लड़ाई थोड़ी सरल हो जाती है।
कैंसर के मरीजों को मानसिक संबल प्रदान करने के तरीके
अक्सर, कैंसर के मरीज मन ही मन यह मान लेते हैं कि इस बीमारी का कोई निश्चित इलाज संभव नहीं है। ऐसे में, उन्हें ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता होती है जो बिना किसी उपदेश, टोका-टाकी या बहस के, बस उनकी बातें सुनें। उपचार के दौरान मरीज के मन की बातों को सुनना, वास्तव में उपचार का एक शक्तिशाली माध्यम सिद्ध हो सकता है।
आज के समय में, कैंसर का इलाज 100% संभव है, फिर भी इसके प्रति लोगों में जागरूकता की कमी बनी हुई है। इसलिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि मरीज को निरंतर यह विश्वास दिलाया जाए कि उनका उपचार सफल हो सकता है और वे हर कठिन परिस्थिति में इस जंग को जीत सकते हैं। परिवार और दोस्तों द्वारा इस विकट घड़ी में कहे गए छोटे-छोटे प्रोत्साहन भरे शब्द, मरीजों के मानसिक बल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में अद्भुत भूमिका निभाते हैं।
कई बार, कैंसर के उपचार के दौरान मरीजों को असहनीय दर्द, चिड़चिड़ापन और क्रोध जैसी भावनाओं से गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में, परिवार वालों के लिए मरीज की भावनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। क्योंकि इस मुश्किल वक्त में, परिवार द्वारा कहे गए "आप इस जंग को जीत सकते हो," "आप बहुत मजबूत हो," "क्यों परेशान होते हो, हम हैं न तुम्हारे साथ" जैसे स्नेहपूर्ण वाक्य, मरीज के क्रोध और दर्द को शांत करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
कैंसर की कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को काफी हद तक कमजोर कर देती हैं। परिणामस्वरूप, मरीज के शारीरिक स्वरूप में कई तरह के बदलाव देखे जा सकते हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में, परिवार वालों को उनके लुक्स की आलोचना करने से बचना चाहिए, बल्कि उन्हें समझाना चाहिए कि यह केवल एक अस्थायी दौर है।
विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि यद्यपि डॉक्टर इलाज करते हैं, परंतु मरीज को असली हौसला अपने प्रियजनों से ही मिलता है। कैंसर से उबरने में रेडिएशन, कीमोथेरेपी और सर्जरी की जितनी भूमिका है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण अपनों का साथ, परिवार का प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव होता है। जब कैंसर का मरीज अपने किसी प्रियजन का हाथ थामकर खड़ा होता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। ये सभी कारक मरीज की रिकवरी में अहम योगदान देते हैं।
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