बच्चों के विकास में विटामिन डी की अहमियत: क्या कमी से रुक जाती है ग्रोथ?
बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए विटामिन डी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह न केवल उनकी हड्डियों को मजबूत बनाने और लंबाई बढ़ाने में सहायक है, बल्कि बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए भी कई तरह से फायदेमंद है। हालांकि, यह भी सच है कि किसी बच्चे की लंबाई केवल विटामिन डी पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि शारीरिक गतिविधि और आनुवंशिकी जैसे अन्य कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिर भी, यह एक ऐसा सवाल है जो हर माता-पिता के मन में आता है कि क्या विटामिन डी की कमी बच्चों की ग्रोथ को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। इस आर्टिकल में हम इसी बात पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
विटामिन डी की कमी बच्चों की ग्रोथ पर डाल सकती है बुरा असर
बच्चों के शारीरिक विकास के लिए विटामिन डी का महत्व निर्विवाद है। लेकिन, कई बार यह देखा गया है कि केवल आहार के माध्यम से इस विटामिन की कमी को पूरा करना संभव नहीं होता। विटामिन डी की पूर्ति के लिए सबसे प्रभावी तरीका है बच्चों को धूप में खेलने के लिए प्रोत्साहित करना। सूर्य की किरणें ही विटामिन डी का प्राकृतिक और मुख्य स्रोत हैं।
रिकेट्स का खतरा:
जब बच्चों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पाता है, तो उनकी ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। डॉक्टर इस बात की पुष्टि करते हैं कि विटामिन डी की कमी से बच्चों में ‘रिकेट्स’ नामक बीमारी हो सकती है। इस स्थिति में हड्डियां कमजोर और नरम पड़ जाती हैं, जिससे पैरों में टेढ़ापन आ सकता है और बच्चों को चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। इस प्रकार, विटामिन डी की कमी बच्चों की ग्रोथ को निश्चित रूप से नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
कद का विकास बाधित होना:
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चों को उनके विकास के महत्वपूर्ण चरणों में पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिलता है, तो उनके कद के विकास में बाधा आ सकती है। असल में, विटामिन डी की कमी से शरीर में अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित होता है, विशेषकर कैल्शियम का। कैल्शियम के उचित अवशोषण के बिना, बच्चों की लंबाई का विकास संभव नहीं है।
मोटर स्किल्स का विकास:
एक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के बढ़ते हुए वर्षों में यदि उन्हें पर्याप्त विटामिन डी न मिले, तो उनके मोटर स्किल्स (शारीरिक गतिविधियां सीखने की क्षमता) के विकास पर भी असर पड़ सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि मांसपेशियों के तालमेल और विभिन्न शारीरिक गतिविधियों को सीखने की गति धीमी हो सकती है, जो बच्चे के समग्र विकास के लिए चिंता का विषय है।
मस्तिष्क का विकास:
यह जानकर आश्चर्य हो सकता है, लेकिन विटामिन डी का बच्चों के मस्तिष्क के विकास से भी गहरा संबंध है। विशेषज्ञों का मानना है कि विटामिन डी एक न्यूरोएक्टिव स्टेरॉयड की तरह काम करता है, जो बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चे के विकास के दौरान उसे पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिलता है, तो उनमें न्यूरोसाइकिएट्रिक विकारों (मानसिक और तंत्रिका संबंधी विकार) का खतरा बढ़ सकता है।
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