कड़ाके की ठंड में रूम हीटर बना सकता है ‘काम आसान’, लेकिन जरा सी चूक पड़ सकती है भारी: खरीदारी से पहले जानें ये जरूरी बातें
वर्तमान में पूरा भारत भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड की चपेट में है। जैसे-जैसे पारा गिरता है, बाजारों में रूम हीटर की डिमांड तेजी से बढ़ जाती है। सर्दी के इस सितम से बचने के लिए लोग दिन-रात हीटर का सहारा लेते हैं, लेकिन सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। देश भर से अक्सर हीटर के कारण दम घुटने, शॉर्ट सर्किट से आग लगने और करंट लगने जैसी दुखद खबरें आती रहती हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इनमें से अधिकतर हादसे घटिया क्वालिटी या सुरक्षा फीचर्स (Safety Features) की कमी के कारण होते हैं।
सही हीटर का चुनाव है सबसे अहम
भारत के कई राज्यों में इस वक्त हाड़ कपाने वाली सर्दी पड़ रही है। ऐसे में अगर आप नया रूम हीटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ तकनीकी बातों को समझना अनिवार्य है। दरअसल, रूम हीटर कमरे की हवा को अंदर खींचकर गर्म कॉइल के जरिए बाहर फेंकता है। यदि कमरा पूरी तरह बंद हो, तो लंबे समय तक यह प्रक्रिया चलने से ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिर सकता है और जानलेवा ‘कार्बन मोनोऑक्साइड’ गैस का स्तर बढ़ सकता है। इसीलिए, सही फीचर्स वाले हीटर का चयन आपकी सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है।
ऑटो कट और ओवरहीट प्रोटेक्शन: सुरक्षा की पहली ढाल
नया हीटर लेते समय ‘ऑटो कट’ फीचर की जांच जरूर करें। यह स्मार्ट फीचर हीटर के अत्यधिक गर्म होते ही उसे अपने आप बंद कर देता है, जिससे इंटरनल वायरिंग पिघलने या आग लगने का जोखिम न्यूनतम हो जाता है। बिना ‘ओवरहीट प्रोटेक्शन’ वाले हीटर लगातार गर्म होते रहते हैं, जो किसी भी बड़े हादसे का मुख्य कारण बन सकते हैं।
क्यों जरूरी है टिप-ओवर सेफ्टी स्विच?
यदि आपके घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो ‘टिप-ओवर सेफ्टी स्विच’ वाला हीटर ही खरीदें। यह एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो हीटर के गलती से पलटते या गिरते ही उसकी पावर सप्लाई तुरंत काट देता है। अक्सर हीटर गिरने से पास रखे कपड़े या कालीन आग पकड़ लेते हैं, यह फीचर ऐसे खतरों को रोकता है।
थर्मोस्टेट कंट्रोल: सुरक्षा के साथ बचत भी
एक मानक रूम हीटर में ‘थर्मोस्टेट कंट्रोल’ सिस्टम होना चाहिए। इसकी मदद से आप कमरे की जरूरत के हिसाब से तापमान सेट कर सकते हैं। जैसे ही कमरा निर्धारित तापमान तक गर्म होता है, हीटर खुद-ब-खुद पावर कम कर देता है या बंद हो जाता है। इससे न केवल डिवाइस सुरक्षित रहती है, बल्कि आपके बिजली के बिल में भी भारी बचत होती है।
कमरे के आकार के अनुसार चुनें पावर (वॉट)
हीटर की वॉट क्षमता (Wattage) हमेशा कमरे के साइज के अनुरूप होनी चाहिए। छोटे कमरे में बहुत अधिक पावर वाला हीटर लगाना न केवल बिजली की बर्बादी है, बल्कि यह ऑक्सीजन की कमी का खतरा भी पैदा करता है। एनर्जी एफिशिएंट (Energy Efficient) हीटर लंबे समय के लिए सुरक्षित और किफायती विकल्प साबित होते हैं।
मजबूत बॉडी और भरोसेमंद वायरिंग
खरीदारी के दौरान यह सुनिश्चित करें कि हीटर की बॉडी उच्च गुणवत्ता वाले ‘हीट रेजिस्टेंट’ मटेरियल से बनी हो। हमेशा ISI मार्क वाले उत्पादों को ही प्राथमिकता दें। सस्ते और लोकल हीटर में कमजोर वायरिंग और घटिया प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जिससे बिजली के झटके या शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ जाती है।
हीटर के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए कुछ खास सावधानियां:
- वेंटिलेशन का ध्यान रखें: हीटर चलाते समय कमरे को पूरी तरह सील न करें, थोड़ी क्रॉस-वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) जरूर रखें।
- दूरी बनाए रखें: हीटर को हमेशा ज्वलनशील चीजों जैसे—कपड़े, कागज, पर्दे या लकड़ी के फर्नीचर से दूर रखें। इसे हमेशा समतल और ठोस जगह (जैसे टाइल्स) पर रखें।
- निगरानी जरूरी: बच्चों और पालतू जानवरों को हीटर के करीब न जाने दें।
- रात भर न चलाएं: सोते समय या पूरी रात हीटर चालू रखना खतरनाक हो सकता है। कमरा गर्म होने के बाद इसे बंद कर दें।
- मेंटेनेंस: यदि आप पुराना या रॉड वाला हीटर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी समय-समय पर तकनीकी जांच जरूर करवाएं।
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