रिश्तों की दुनिया में ‘मंकी-बैरिंग’: जब एक डाली छोड़ते ही दूसरी थाम ली जाती है!
हर किसी के रिश्तों को जीने का तरीका जुदा होता है। कुछ लोग अपने लिए वक्त निकालते हैं, खुद को तराशते हैं और फिर जीवन में नई शुरुआत करते हैं। वहीं, दूसरी ओर ऐसे भी लोग होते हैं जिनके लिए खालीपन बर्दाश्त से बाहर होता है। उनका एक पैटर्न होता है – जैसे ही एक डोर कटती है, दूसरी मजबूत पकड़ में आ जाती है। इसी आदत को आज के दौर में ‘मंकी-बैरिंग’ का नाम दिया गया है।
‘मंकी-बैरिंग’ क्या है?
यह शब्द बंदरों के व्यवहार से प्रेरित है। जैसे एक बंदर एक डाल को तब तक नहीं छोड़ता जब तक दूसरी डाल पर उसकी पकड़ मजबूत न हो जाए, वैसे ही ‘मंकी-बैरिंग’ करने वाले लोग पुराने रिश्ते को पूरी तरह से तब तक अलविदा नहीं कहते, जब तक कि नया रिश्ता उनकी जिंदगी में अपनी जगह न बना ले। यानी, ब्रेकअप भले ही आधिकारिक तौर पर बाद में हो, लेकिन असल में नया रिश्ता पहले ही पनपना शुरू हो चुका होता है।
आखिर लोग ऐसा क्यों करते हैं?
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण होता है अकेले रहने का डर। किसी के साथ छूट जाने के बाद महसूस होने वाला खालीपन और फिर से शुरुआत करने की झिझक कई लोगों को बेचैन कर देती है।
- अकेलेपन का डर: कुछ लोगों के लिए सिंगल रहना एक बहुत बड़ी चुनौती होती है।
- नई शुरुआत की हिचकिचाहट: पुराने रिश्ते के बिखराव के बाद जिंदगी को फिर से संवारने का ख्याल ही उन्हें भारी पड़ता है।
- भावनात्मक अलगाव: कई बार मन से रिश्ता कब का खत्म हो चुका होता है, बस दुनिया को बताने की देरी होती है। ऐसे में, किसी नए व्यक्ति का आगमन पुराने रिश्ते को छोड़ने का अंतिम बहाना बन जाता है।
क्या यह धोखा है?
‘मंकी-बैरिंग’ को सीधे तौर पर धोखा कहना या न कहना, यह हर किसी के अपने नज़रिए पर निर्भर करता है। मगर, इसमें ईमानदारी की कमी साफ झलकती है। पुराना साथी सोचता रहता है कि रिश्ता अभी भी कायम है, जबकि असलियत में दूसरा पक्ष काफी पहले ही आगे बढ़ चुका होता है। वहीं, नया साथी भी पूरी सच्चाई से अनभिज्ञ रह सकता है, जिससे रिश्ते की नींव ही हिल जाती है।
इसका नुकसान किसे होता है?
- पुराना साथी: वह भावनात्मक रूप से उस रिश्ते में निवेश करता रहता है जो उसके लिए कब का खत्म हो चुका होता है।
- नया साथी: उसे एक ऐसे रिश्ते का हिस्सा बनना पड़ता है जो बेईमानी पर टिका होता है।
- ‘मंकी-बैरिंग’ करने वाला व्यक्ति: वह अकेले रहकर खुद को समझने और विकसित होने का अमूल्य मौका खो देता है।
रिश्तों में सच्चाई और ठहराव दोनों ही अनमोल होते हैं। यदि कोई रिश्ता खत्म हो रहा है, तो उसे विदा होने का समय दें और खुद को भी खुद को संभालने का मौका दें। ‘मंकी-बैरिंग’ भले ही खालीपन से बचने का एक आसान रास्ता लगे, लेकिन यह दूसरों के साथ-साथ खुद के लिए भी दर्द और असमंजस का सबब बनता है। अकेले रहना बेशक मुश्किल हो सकता है, पर यही वह दौर है जो आपको मज़बूत और आत्मनिर्भर बनाता है।
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