सेहत का राज़: आपकी टॉयलेट की आदतें!
हमारी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतें, चाहे वो उठना-बैठना हो, खाना-पीना हो या फिर चलना-फिरना, हमारी सेहत पर गहरा असर डालती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप टॉयलेट कैसे जाती हैं, यह भी आपकी सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है? जी हाँ, महिलाएं अक्सर अनजाने में एक ऐसी गलती कर बैठती हैं, जिसका सीधा असर उनकी पेल्विक फ्लोर की सेहत पर पड़ता है।
यह तो हम सब जानते हैं कि बाथरूम की कुछ आदतें हमारे पेल्विक फ्लोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन ज़्यादातर महिलाओं को इस बारे में ज़रा भी इल्म नहीं होता। अक्सर, जब ज़रूरत महसूस होती है, तो हम फटाफट बाथरूम की ओर भागती हैं और कुछ ही पलों में काम निपटाने की फिराक में रहती हैं। इस जल्दबाज़ी में हम अतिरिक्त ज़ोर लगाती हैं, ताकि पेशाब जल्दी हो जाए। पर शायद आपको यह नहीं पता कि इस तरह की जल्दबाज़ी और ज़ोर लगाने से आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं।
पावर पीइंग: एक अनदेखा खतरा
“पावर पीइंग” – यह शब्द शायद आपके लिए नया हो, पर यह पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और यूरिनरी लीकेज का एक बहुत बड़ा कारण है। दरअसल, पावर पीइंग का मतलब है पेशाब करने के लिए ज़ोर लगाना, या फिर बहुत तेज़ी से पेशाब करने की कोशिश करना। अगर आप पेशाब करते समय अपनी यूरिन स्ट्रीम को और तेज़ करने के लिए ज़ोर लगा रही हैं, या जितनी जल्दी हो सके काम खत्म करने के लिए खुद पर दबाव डाल रही हैं, तो आप अनजाने में पावर पीइंग कर रही हैं।
पावर पीइंग के चौंकाने वाले नुकसान
आमतौर पर लोग पेशाब को ज़्यादा देर तक रोके रखने के नुकसानों के बारे में तो बात करते हैं, लेकिन पेशाब करते समय लगाए जाने वाले अतिरिक्त ज़ोर से आपके पेल्विक फ्लोर हेल्थ को कितना नुकसान पहुंच सकता है, इस पर शायद ही कोई ध्यान देता है। पर हकीकत यही है कि कई लोग ऐसा करते हैं। जैसे, जब कैब बाहर आकर खड़ी हो, तो जल्दी में ज़्यादा ज़ोर लगाकर पेशाब करने की कोशिश की जाती है। या फिर बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर फौरन टॉयलेट से निकलने की चाहत में हम खुद पर दबाव बनाती हैं। पर यह सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। सच तो यह है कि मूत्राशय को खाली करने के लिए ज़ोर लगाने की ज़रूरत ही नहीं है। टॉयलेट को पुश करने से एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है, जो समय के साथ आपके पेल्विक फ्लोर की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
इन आदतों को कहें अलविदा
विशेषज्ञों की मानें तो अपने ब्लैडर को खाली करने के लिए अतिरिक्त ज़ोर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपका ब्लैडर खुद ही पेशाब को बाहर धकेलने का काम करता है। लेकिन अगर आप बार-बार पुश करती हैं, तो यह अतिरिक्त दबाव समय के साथ आपके पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों और लिगामेंट्स को खिंचाव में डाल सकता है। इससे पेल्विक फ्लोर की कमजोरी, यूरिनरी लीकेज और यहां तक कि पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इनसे बचने का सबसे आसान तरीका है – पावर पीइंग की आदत को छोड़ना।
पेशाब करने का सही तरीका: स्वस्थ पेल्विक फ्लोर का राज
अब जब आप यह जान चुकी हैं कि आपकी एक छोटी सी आदत आपकी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा सकती है, तो यह जानना बहुत ज़रूरी है कि पेशाब करने का सही और सुरक्षित तरीका क्या है, ताकि आप इन नुकसानों से बच सकें। इसके लिए आपको बस दो बातों का ध्यान रखना है:
1. सही ढंग से बैठें और आराम करें:
अपनी पूरी बॉडी का वज़न सीट पर रखें और आराम से बैठें। टॉयलेट सीट पर झूलने से आपकी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करना मुश्किल हो सकता है। इसके बजाय, कुछ गहरी सांसें लें और अपनी योनि की मांसपेशियों को ढीला छोड़ें। इससे यूरिनरी स्फिंक्टर को आराम मिलता है और पेशाब का बहाव आसानी से शुरू हो जाता है।
2. ज़ोर न लगाएं, बस आराम करें:
पेशाब करते समय कभी भी अतिरिक्त ज़ोर न लगाएं, खासकर जब आप आखिरी कुछ बूंदों को खाली करने की कोशिश कर रही हों। अगर आपको लगे कि पेशाब की कुछ बूंदें बची हैं, तो अपने कूल्हों को हल्का सा दाएं-बाएं हिलाएं। या फिर आप खड़ी होकर फिर से बैठने की कोशिश कर सकती हैं, इससे बचा हुआ पेशाब निकल जाएगा। हमेशा याद रखें, पेशाब करते समय ज़ोर लगाना या तनाव डालना बिल्कुल भी सही नहीं है। पेल्विक फ्लोर से जुड़ी दिक्कतों से बचने के लिए, टॉयलेट में आराम से समय लें और पावर पीइंग से पूरी तरह बचें।
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