बिहार में सीट बंटवारे को लेकर एनडीए में घमासान: छोटे सहयोगियों में असंतोष की लहर
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सीट बंटवारे की घोषणा के साथ ही गठबंधन के भीतर असंतोष की आवाजें मुखर होने लगी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भाजपा जहां 101-101 सीटों पर ताल ठोकेंगी, वहीं सहयोगी दलों में सीटों की संख्या को लेकर नाराजगी साफ झलक रही है।
उपेंद्र कुशवाहा का दर्द: ‘सबका गुस्सा शांत होने के बाद समझेंगे निर्णय’
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को छह-छह सीटें मिलने पर दोनों दलों ने अपना असंतोष व्यक्त किया है। कुशवाहा ने देर रात ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए लिखा, “प्रिय साथियों, मैं आप सबसे क्षमा मांगता हूं। हमें जितनी सीट मिली है, वह आपकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं। मैं समझता हूं कि यह फैसला उन साथियों को आहत करेगा जो हमारी पार्टी से उम्मीदवार बनने की उम्मीद रखे थे। आज कई घरों में खाना नहीं बना होगा। फिर भी मुझे भरोसा है कि आप सभी मेरी और पार्टी की मजबूरियों को समझेंगे। मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि पहले आप सबका गुस्सा शांत हो जाए, फिर खुद समझ पाएंगे कि यह फैसला कितना सही या गलत था। बाकी बात समय बताएगा।”
जीतन राम मांझी की नाराज़गी: ‘हमें कमतर आंका गया’
वहीं, जीतन राम मांझी ने भी सीटों की संख्या पर निराशा व्यक्त की है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “ऊपर से जो फैसला हुआ है, हमने उसे स्वीकार किया है। लेकिन सिर्फ छह सीट देकर हमें कमतर आंका गया है। इसका असर चुनाव में एनडीए पर पड़ेगा।” मांझी अपनी पार्टी को मान्यता दिलाने के लिए कम से कम 15 सीटों की मांग कर रहे थे।
सीट बंटवारे का खाका और कांग्रेस का तंज
एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए 101-101 सीटों पर जदयू और भाजपा को उतारा है, जबकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, हम और आरएलएम को महज छह-छह सीटें मिली हैं। यह पहली बार है जब बिहार में एनडीए के दोनों छोटे घटक दल बराबर संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
इस बीच, कांग्रेस ने भी एनडीए पर तंज कसा है। पटना में कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा, “सीट बंटवारे से यह साफ है कि भाजपा ने नीतीश कुमार को सीमित कर दिया है। अब तक हर चुनाव में जदयू भाजपा से ज्यादा सीट पर लड़ती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में भाजपा जदयू को पूरी तरह निगल जाएगी।”
एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पनपा यह असंतोष आगामी चुनावों में गठबंधन के लिए कितनी चुनौतियां खड़ी करता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
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