अहोई अष्टमी 2025: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और तारा उदय का विशेष समय

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Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी आज, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त? कितने बजे दिया जाएगा तारे को अर्ध्य? | Ahoi Ashtami 2025: Know Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Katha, Tara Rising Time and Significance In Hindi

अहोई अष्टमी 2025: संतान की सुख-समृद्धि का व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

नई दिल्ली: संतान के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना से रखा जाने वाला पवित्र व्रत अहोई अष्टमी आज है। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जब माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। अहोई माता की पूजा-अर्चना कर माताएं अपनी संतान की रक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

संतान प्राप्ति की भी है मान्यता:
मान्यता है कि जो महिलाएं संतानहीन हैं और सच्चे मन से अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं, अहोई माता उनकी गोद अवश्य भरती हैं। शाम को तारे देखकर और उन्हें अर्ध्य देकर ही माताएं अपना उपवास खोलती हैं।

अहोई अष्टमी 2025 का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2025 Shubh Muhurt):
कार्तिक कृष्ण अष्टमी का प्रारंभ आज दोपहर 12:24 बजे से हो रहा है और इसका समापन मंगलवार, 11 नवंबर, 2025 को सुबह 11:09 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष का व्रत आज ही रखा जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त आज शाम 5:33 बजे से 07:08 बजे तक है। तारों का उदय होने का समय शाम 7:32 बजे है।

पूजा सामग्री (Ahoi Ashtami 2025):
अहोई अष्टमी की पूजा के लिए अहोई माता की मूर्ति या चित्र, जल से भरा कलश, सुपारी, दीपक, फल, फूल, हलवा-पूरी, चांदी का अहोई प्रतीक, सूत और चावल अवश्य रखें।

अहोई अष्टमी 2025 पूजा विधि:

  • प्रातः काल स्नान करके अहोई माता के व्रत का संकल्प लें।
  • दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या तैयार पोस्टर लगाएं। इसके साथ सप्त बालक (संतान) और सेइ (साही/साहीन) का भी चित्र बनाएं।
  • पूजा सामग्री को व्यवस्थित करें।
  • माता को हलवा-पुड़ी का भोग लगाएं।
  • हाथ में गेहूं के सात दाने और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई की कथा सुनें।
  • तारे निकलने पर उन्हें अर्ध्य दें और फिर भोजन ग्रहण करें।

अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami 2025):
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार एक स्त्री अनजाने में जंगल में मिट्टी खोदते समय एक शावक को मार देती है। इस पाप के प्रभाव से उसके बच्चों की मृत्यु होने लगती है। अत्यंत दुखी होकर वह स्त्री देवी से प्रार्थना करती है। देवी अहोई उस पर कृपा करती हैं और बताती हैं कि कार्तिक अष्टमी के दिन उनका व्रत करने से यह दोष दूर होगा। तभी से संतान की रक्षा के लिए यह व्रत किया जाने लगा।

अस्वीकरण: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय अवश्य लें।


English summary:
Ahoi Ashtami 2025: Know Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Katha, Tara Rising Time and Significance In Hindi


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