अहोई अष्टमी व्रत: इन 5 बड़ी गलतियों से बचें, जानिए क्या खाएं, किससे बनाएं दूरी और व्रत खोलने का सही नियम
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत बेहद कठिन और फलदायी माना जाता है। इस दिन माता अहोई और स्याउ माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
लेकिन, इस व्रत के दौरान जरा सी भी चूक या लापरवाही भारी पड़ सकती है। अगर आप भी अहोई अष्टमी का व्रत रखने जा रही हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्या खाना चाहिए, किन चीजों से परहेज करना चाहिए और व्रत का पारण (व्रत खोलना) कैसे करना चाहिए। आइए जानते हैं इससे जुड़े सभी जरूरी नियम।
अहोई अष्टमी व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां
- नुकीली या धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें: व्रत के दिन चाकू, सुई या किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग करने से बचना चाहिए। इस दिन कपड़े सिलना या काटना भी अशुभ माना जाता है।
- तांबे के बर्तन का इस्तेमाल वर्जित: पूजा के दौरान तांबे के लोटे या बर्तनों का प्रयोग न करें। जल देने या अर्घ्य देने के लिए पीतल या अन्य धातुओं के बर्तनों का उपयोग करना श्रेष्ठ माना जाता है।
- सोएं नहीं: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए। पूरा दिन माता का स्मरण और उनकी कथा सुनने में बिताना चाहिए।
- सास या बड़ों का अनादर न करें: इस पावन दिन किसी से भी वाद-विवाद न करें, विशेषकर अपनी सास या घर के बुजुर्गों का अपमान भूलकर भी न करें।
- काले रंग के कपड़े न पहनें: पूजा के समय या पूरे दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें। इस दिन लाल, पीले या गुलाबी रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है।
क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज?
चूंकि यह व्रत निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है, इसलिए व्रत के दौरान कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता। हालांकि, जो महिलाएं स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत नहीं रख पाती हैं, वे फलाहार कर सकती हैं:
- क्या खाएं (फलाहार में): आप मखाना, सिंघाड़े का आटा, व्रत वाला नमक (सेंधा नमक), फल, दूध, और दही का सेवन कर सकती हैं।
- किससे करें परहेज: व्रत के दौरान तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा साधारण नमक, चावल, गेहूं और दालों का भी उपयोग न करें।
व्रत खोलने का सही तरीका और नियम
अहोई अष्टमी के व्रत में समय का बहुत महत्व होता है। आइए जानते हैं व्रत खोलने की सही विधि:
- तारों को अर्घ्य दें: इस व्रत का समापन सूर्योदय या सूर्यास्त से नहीं, बल्कि तारों को देखने के बाद किया जाता है। शाम को पूजा करने के बाद आसमान में तारे निकलने का इंतजार करें।
- दूध-भात से खोलें व्रत: तारे दिखने के बाद दूध और चावल (भात) से व्रत का पारण किया जाता है। कई जगहों पर जल से भी व्रत खोला जाता है।
- चांदी की अहोई की पूजा: गले में पहनी जाने वाली चांदी की ‘अहोई’ (जिसे होई भी कहते हैं) और मोती की माला की पूजा करने के बाद ही जल ग्रहण करें।
- बड़ों का आशीर्वाद लें: व्रत खोलने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लें और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें।
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