स्वर्ग से उतरा पारिजात: जिसकी खुशबू में बसते हैं महादेव और पूरी होती है हर मुराद
पारिजात, जिसे हम हरसिंगार के नाम से भी जानते हैं, केवल अपनी मनमोहक सुगंध के लिए ही नहीं, बल्कि अपने गहरे धार्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिव्य पौधे को स्वयं देवराज इंद्र के स्वर्ग से धरती पर लाया गया था। हरिवंश पुराण में तो पारिजात को एक ऐसा ‘कल्पवृक्ष’ बताया गया है, जो श्रद्धा से मांगी गई हर मनोकामना पूरी करने की शक्ति रखता है। इस फूल की सबसे रहस्यमयी खूबी यह है कि यह सूर्य की तपिश में नहीं, बल्कि चांदनी की शीतलता में खिलता है और भोर होने से पहले ही शाख से झड़ जाता है।
शिव साधना और पारिजात: फूल अर्पित करने का वह अनोखा नियम
देवाधिदेव महादेव को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं। भक्तों का विश्वास है कि भोलेनाथ को ये पुष्प अर्पित करने से न केवल पूजा सफल होती है, बल्कि जीवन के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं।
हालांकि, शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाने का एक बेहद खास और अनोखा नियम है। शास्त्रों के अनुसार, पूजा के लिए पारिजात के फूल कभी भी टहनी से नहीं तोड़ने चाहिए। माना जाता है कि तोड़कर चढ़ाया गया फूल महादेव स्वीकार नहीं करते और पूजा निष्फल हो सकती है। यह सृष्टि का इकलौता ऐसा फूल है, जिसे जमीन से उठाकर भगवान पर चढ़ाना श्रेष्ठ माना जाता है। इतना ही नहीं, अपनी अपार शुद्धता के कारण इसे चढ़ाने से पहले धोने की आवश्यकता भी नहीं होती। इस विधि से पारिजात अर्पित करने वाले भक्त पर महादेव की विशेष कृपा बरसती है।
समुद्र मंथन से कृष्ण की रुक्मिणी तक: इसका वास्तु और पौराणिक वैभव
अक्सर लोग पारिजात को केवल घर की शोभा बढ़ाने वाला पौधा मानते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। कथाओं के अनुसार, पारिजात की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी, जो चौदह रत्नों में से एक था।
इस दिव्य वृक्ष को धरती पर लाने का श्रेय भगवान श्रीकृष्ण को जाता है, जो इसे अपनी प्रिय पत्नी रुक्मिणी के लिए स्वर्ग से लेकर आए थे। आज भी मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में पारिजात के फूलों का उपयोग प्रेम, शुद्धि और अटूट भक्ति के प्रतीक के रूप में किया जाता है। वास्तु की दृष्टि से भी इसे घर में लगाना सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है।
प्रकृति का अनमोल वैद्य: औषधीय गुणों का भंडार
पारिजात का पौधा केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। आयुर्वेद में इसके तने, पत्तों, फूलों, छाल और बीजों को सेहत का खजाना माना गया है। जोड़ों के दर्द से लेकर कई गंभीर बीमारियों के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, पारिजात के फूलों से निर्मित सुगंधित इत्र अपनी रूहानी खुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


