एशियाई पैरा खेल: शीतल देवी का स्वर्णमयी निशाना, स्वाति और तोमन ने भी रचा इतिहास
एशियाई पैरा खेलों के मैदान पर भारत की अद्भुत तीरंदाज शीतल देवी ने अपनी अचूक एकाग्रता से स्वर्णिम इतिहास लिख दिया है। बिना हाथों के तीरंदाजी करने वाली 19 वर्षीय विश्व चैंपियन शीतल ने महिलाओं की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा और मिश्रित टीम स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। व्यक्तिगत फाइनल के बेहद तनावपूर्ण क्षणों में शीतल ने गजब का धैर्य दिखाया और सिंगापुर की अलीम नूर शाहिदा को 142-139 के अंतर से शिकस्त दी। इसी के साथ उन्होंने इन खेलों में कुल तीन पदक (दो स्वर्ण और एक रजत) अपने नाम कर लिए हैं।
शीतल की स्वर्णिम सफलता का सफर यहीं नहीं थमा। उन्होंने तोमन कुमार के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इससे पहले शीतल ने महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में पायल नाग के साथ रजत पदक हासिल किया था। हांगझोउ में आयोजित इन खेलों में शीतल का प्रदर्शन वाकई बेमिसाल रहा है। दूसरी ओर, महिलाओं की डब्ल्यू1 स्पर्धा में स्वाति चौधरी ने रजत पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। हालांकि वह फाइनल में चीन की सेन मेंगकान से 4-6 से हार गईं, लेकिन इस श्रेणी में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
भारत की तीरंदाजी टीम ने अब तक कुल चार पदक अपनी झोली में डाल लिए हैं, जबकि रिकर्व एलिमिनेशन राउंड शुक्रवार को होना है। व्यक्तिगत स्पर्धा के कांस्य पदक के मुकाबले में तोमन कुमार को चीन के झांग यिचेंग से 139-148 से हार का सामना करना पड़ा। शीतल के व्यक्तिगत मुकाबले की बात करें तो शुरुआत में अलीम ने चार अंकों की बढ़त बना ली थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर की इस जांबाज खिलाड़ी ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार 10-10 अंक बटोरे। उन्होंने तीन बार निशाने के बिल्कुल केंद्र (X) पर तीर लगाकर अंतिम सेट से पहले बढ़त बना ली और अंत में जीत सुनिश्चित की।
मिश्रित टीम स्पर्धा के फाइनल में शीतल और तोमन की जोड़ी ने इंडोनेशियाई जोड़ी को 151-148 से मात दी। क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली इस भारतीय जोड़ी ने फाइनल में शुरू से ही अपना दबदबा बनाए रखा। पहले सेट में 38-37 की बढ़त लेने के बाद, दूसरे सेट में उन्होंने इसे 77-73 कर दिया। अंतिम क्षणों में इंडोनेशियाई टीम के प्रयासों के बावजूद भारतीय जोड़ी ने तीन अंकों के अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में भी इन्होंने चीनी ताइपे को 142-141 के नजदीकी अंतर से हराया था।
स्वर्ण पदक विजेता तोमन कुमार की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। छत्तीसगढ़ के बलोद जिले के रहने वाले 31 वर्षीय तोमन सीआरपीएफ में तैनात हैं। साल 2022 में झारखंड में माओवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान आईईडी विस्फोट में उन्होंने अपना बायां पैर गंवा दिया था, लेकिन उनके हौसले ने उन्हें खेल के मैदान पर विजेता बना दिया। वहीं, मेरठ की 37 वर्षीय स्वाति चौधरी ने डब्ल्यू1 श्रेणी में अपनी चमक बिखेरी। एथेंस ओलंपिक के दिग्गज सत्यदेव प्रसाद की देखरेख में प्रशिक्षण लेने वाली स्वाति ने फाइनल में शानदार शुरुआत की थी और 4-2 की बढ़त भी बनाई, लेकिन अंत में चीनी प्रतिद्वंदी ने 21-28 के स्कोर के साथ बाजी पलट दी।
भले ही स्वाति स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन उनकी उपलब्धि ऐतिहासिक है। डब्ल्यू1 श्रेणी उन एथलीटों के लिए होती है जो गंभीर शारीरिक अक्षमताओं या अंगों की शक्ति में कमी (जैसे टेट्राप्लेजिया) से जूझ रहे होते हैं। स्वाति ने पिछले महीने अहमदाबाद में भी कांस्य पदक जीता था। भारत की झोली में आए ये पदक खिलाड़ियों के अदम्य साहस और कड़ी मेहनत की गवाही दे रहे हैं। अब सबकी नजरें आगामी रिकर्व स्पर्धाओं पर टिकी हैं।
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