पैरा जूडो: रजत के साथ लौटीं कोकिला कौशिक, अब ‘स्वर्ण’ और ‘पैरालंपिक’ पर टिकी निगाहें
जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई पैरा खेलों में अपनी चमक बिखेरने के बाद भारतीय पैरा जूडोका कोकिला कौशिक स्वदेश लौट आई हैं। उनके गले में चमकता रजत पदक उनकी कड़ी मेहनत की गवाही दे रहा था। गुरुवार शाम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही कोकिला के चेहरे पर भविष्य के लिए एक नया संकल्प दिखा। महिलाओं की J2 52 किग्रा श्रेणी में सिल्वर मेडल जीतने वाली कोकिला ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वह अगली बार अपनी हार का हिसाब बराबर करेंगी और स्वर्ण पदक जीतकर ही दम लेंगी। कोकिला उस जांबाज भारतीय दल का हिस्सा थीं, जिसने इस महाद्वीपीय मंच पर दो पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। उनके साथ पुरुषों की J1 70 किग्रा श्रेणी में कपिल परमार ने भी कांस्य पदक जीतकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
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अपनी इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कोकिला ने एएनआई (ANI) से बातचीत में कहा, “फिलहाल मुझे सिल्वर मेडल मिला है। लक्ष्य तो गोल्ड का था, लेकिन देश के लिए पदक जीतना अपने आप में एक गौरवपूर्ण एहसास है। यह सिल्वर अगली बार पक्का गोल्ड में बदलेगा।” भारत को गौरवान्वित करने की खुशी उनके शब्दों में साफ झलक रही थी। गौरतलब है कि 2023 के हांगझोऊ एशियाई पैरा खेलों में कोकिला ने कांस्य पदक जीता था, जिसे अब उन्होंने रजत में तब्दील कर दिया है। अब उनकी नजरें लंबी छलांग पर हैं। उन्होंने भविष्य का खाका खींचते हुए बताया, “अगले साल वर्ल्ड गेम्स हैं और फिर 2028 के पैरालंपिक खेल। मेरा सारा ध्यान अब उनकी तैयारियों और कड़ी प्रैक्टिस पर है।”
स्वर्ण पदक के बेहद रोमांचक मुकाबले में कोकिला को किर्गिस्तान की ऐबिके उलानबेक काइज़ी से कड़ी चुनौती मिली, जहाँ प्रतिद्वंद्वी ने 21 सेकंड में ‘इप्पोन’ के जरिए मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारतीय ब्लाइंड एंड पैरा जूडो एसोसिएशन के सीईओ मुनव्वर अंज़ार ने टीम की इस सफलता पर खुशी जाहिर की, लेकिन बदलती चुनौतियों से भी आगाह किया। उन्होंने कहा, “जब तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराता है, तो गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है। हमें अपने खिलाड़ियों पर नाज है। हालांकि, मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो चुका है। अब हमारा मिशन ‘वर्ल्ड गेम्स’ है। हमने एलए (LA) पैरालंपिक के लिए भी बड़ा लक्ष्य रखा है, जहाँ हम कम से कम दो पदक जीतने की उम्मीद कर रहे हैं।”
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कोकिला की क्षमता पर बात करते हुए अंजार ने एक दिलचस्प पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि कोकिला अपनी वेट कैटेगरी में मात्र 22 साल की सबसे युवा खिलाड़ी हैं, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी (कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की एथलीट) 28 से 30 वर्ष की अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्हें पछाड़ने के लिए कोकिला को शारीरिक और मानसिक रूप से अभी और परिपक्व होना होगा, जिसमें एक-दो साल का समय लगेगा। वहीं, पुरुषों के J1 70kg इवेंट में कांस्य पदक जीतने वाले कपिल परमार ने भी अपनी जीत की दास्तां सुनाई। सेमीफाइनल की हार से उबरते हुए कपिल ने ब्रॉन्ज मेडल मैच में जबरदस्त वापसी की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “कोच ने साफ कह दिया था कि खाली हाथ घर नहीं जाना है। हार के बाद हमने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और महज कुछ ही मिनटों में इंडोनेशियाई खिलाड़ी को शिकस्त देकर तिरंगे का मान रखा।”
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