बड़ा मंगल: बजरंगबली को लगाएं ये 5 प्रिय भोग, बरसेगी असीम कृपा; जानें क्यों है ये दिन इतना खास!

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बड़ा मंगल: बजरंगबली को लगाएं ये 5 प्रिय भोग, बरसेगी असीम कृपा; जानें क्यों है ये दिन इतना खास!
क्यों खास है Bada Mangal? हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाएं ये 5 Special भोग, जानें पौराणिक महत्व

बड़ा मंगल 2026: आस्था, सेवा और बजरंगबली की कृपा का महापर्व

ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में जब भक्ति की शीतल बयार चलती है, तो उसे हम ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के रूप में पूजते हैं। हिंदू धर्म में इस दिन का महत्व अद्वितीय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के इसी पावन समय में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और संकटमोचन हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी। यह पर्व न केवल धार्मिक अटूट आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा भाव को भी जीवंत करता है। इस वर्ष 2026 में ‘अधिक मास’ के विशेष संयोग के कारण ज्येष्ठ माह में कुल 8 ‘बड़े मंगल’ का अद्भुत योग बन रहा है।

वर्ष 2026: 8 बड़े मंगल की पावन तिथियां

  • पहला बड़ा मंगल: 5 मई (मंगलवार)
  • दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई (मंगलवार)
  • तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई (मंगलवार)
  • चौथा बड़ा मंगल: 26 मई (मंगलवार)
  • पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून (मंगलवार)
  • छठा बड़ा मंगल: 9 जून (मंगलवार)
  • सातवां बड़ा मंगल: 16 जून (मंगलवार)
  • आठवां बड़ा मंगल: 23 जून (मंगलवार)

बजरंगबली के प्रिय भोग: प्रसन्न करने के उत्तम उपाय
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार विभिन्न प्रकार के नैवेद्य अर्पित करते हैं:

  • बूंदी के लड्डू: यह हनुमान जी का सबसे प्रिय प्रसाद है। माना जाता है कि इसे अर्पित करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
  • बेसन के लड्डू: शुद्ध देसी घी से निर्मित बेसन के लड्डू चढ़ाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
  • इमरती और जलेबी: केसरिया रंग की रसीली इमरती और जलेबी का भोग पवनपुत्र को अत्यंत प्रिय है।
  • तुलसी दल: ध्यान रखें कि हनुमान जी के किसी भी भोग में तुलसी का पत्ता अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।
  • पान का बीड़ा: रुके हुए कार्यों को सिद्ध करने और सफलता पाने के लिए गुलकंद व सौंफ वाला मीठा पान अर्पित करना बेहद शुभ है।
  • रोट का प्रसाद: गेहूं के आटे, गुड़ और घी के मेल से बना पारंपरिक ‘रोट’ बड़े मंगल पर विशेष रूप से बनाया जाता है।

धार्मिक महत्व और ‘बुढ़वा मंगल’ की कथा
शास्त्रों के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही राम-हनुमान का मिलन हुआ था। इसके अलावा, इसी कालखंड में हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर महाबली भीम के अहंकार को नष्ट किया था, इसीलिए इस दिन को ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी ख्याति प्राप्त है। मान्यता है कि इन दिनों में किया गया दान-पुण्य और विशाल भंडारों का आयोजन जातक को दोगुना फल प्रदान करता है और जीवन में खुशहाली लाता है।

सच्ची सेवा के उपाय
बड़े मंगल के दिन केवल मंदिर में माथा टेकना ही पर्याप्त नहीं है। इस दिन की वास्तविक महिमा ‘सेवा’ में छिपी है। राहगीरों को ठंडा जल पिलाना और भूखों को भोजन कराना हनुमान जी की सबसे बड़ी पूजा मानी जाती है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान ही आपको बजरंगबली की असीम कृपा का पात्र बनाता है।


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