भीष्म पंचक 2025: मोक्ष और महापुण्य के पावन अवसर का स्वर्णिम द्वार 1 नवंबर से

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
भीष्म पंचक 2025: मोक्ष और महापुण्य के पावन अवसर का स्वर्णिम द्वार 1 नवंबर से
Bhishma Panchak 2025: 1 नवंबर से भीष्म पंचक, मोक्ष और महापुण्य का ये सुनहरा अवसर न चूकें, जानें विधि

पंचक: शुभ-अशुभ का संगम और भीष्म पंचक का महात्म्य

‘पंचक’ मात्र पांच दिनों की अवधि नहीं, बल्कि हिंदू पंचांग में एक विशेष महत्व रखने वाला कालखंड है। महीने के अंतिम पांच दिन, जिन्हें पंचक के नाम से जाना जाता है, पारंपरिक रूप से मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं। इन दिनों में गृह प्रवेश, विवाह या किसी नए कार्य का शुभारंभ करने से बचने की मान्यता प्रचलित है। हालांकि, हर पंचक का स्वरूप एक जैसा नहीं होता। कुछ विशेष महीनों में आने वाले पंचक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी सिद्ध होते हैं। जब पंचक का संबंध किसी देव उपासना या महत्वपूर्ण धार्मिक घटना से जुड़ जाता है, तो यह एक पवित्र और कल्याणकारी अवसर बन जाता है।

भीष्म पंचक: विष्णु का आह्वान और कार्तिक का चरम

भीष्म पंचक, जिसे विष्णु पंचक के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक मास के अंतिम पांच दिनों का विशेष काल है। इसे ‘पंचभीखा’ या ‘पंच भीखम’ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य में लीन रहते हैं, जिससे उन्हें पूरे कार्तिक मास का व्रत करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह पांच दिवसीय अनुष्ठान महाभारत काल के महान योद्धा, भीष्म पितामह के सम्मान में किया जाता है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के उपरांत, भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ज्ञान प्रदान किया था, जो एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों तक चला। इन पवित्र दिनों में भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

2025 में भीष्म पंचक का आगमन: 1 से 5 नवंबर

प्रत्येक वर्ष, कार्तिक मास का समापन होने से पांच दिन पूर्व भीष्म पंचक का शुभारंभ होता है और पूर्णिमा तिथि को इसका समापन होता है। वर्ष 2025 में, भीष्म पंचक 01 नवंबर से प्रारंभ होकर 05 नवंबर तक रहेगा।

भीष्म पंचक का महत्व: त्याग, मोक्ष और पुण्य का संगम

भीष्म पंचक का महत्व महाभारत के महायोद्धा भीष्म पितामह के कार्तिक मास के अंतिम पांच दिनों में किए गए उपवास से जुड़ा है। यह काल चातुर्मास के अंत में आता है, जिसे मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मुख्य रूप से, यह पंचक पितामह भीष्म के स्मरण और उनके त्याग का प्रतीक है। यह भी माना जाता है कि जो भक्त पूरे कार्तिक मास का व्रत नहीं रख पाते, उन्हें भीष्म पंचक का व्रत करने से संपूर्ण मास का पुण्य लाभ प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार, भीष्म पंचक त्याग, ज्ञान और पुण्य का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *