धनतेरस से दिवाली तक: कुबेर देव के इन मंदिरों में करें दर्शन, धन की कमी होगी दूर!
धनतेरस का पावन पर्व, दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन देव कुबेर की आराधना की जाती है, जो धन के देवता माने जाते हैं। सामान्यतः कुबेर की पूजा में मूर्ति का प्रयोग वर्जित है, पर भारत में कुछ ऐसे अद्भुत मंदिर हैं जो कुबेर देव को समर्पित हैं और जहाँ उनकी मूर्तियाँ विराजमान हैं। धनतेरस से लेकर दिवाली तक इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि इन मंदिरों में दर्शन करने मात्र से व्यक्ति कर्जों से मुक्ति पा लेता है और आर्थिक तंगी दूर होती है। यदि आप भी धन की मनोकामना रखते हैं, तो इन प्राचीन मंदिरों के दर्शन अवश्य करें।
कुबेर भंडारी मंदिर, गुजरात
गुजरात के वडोदरा जिले में स्थित ‘कुबेर भंडारी मंदिर’ धन के देवता का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान शिव ने करवाया था। कहा जाता है कि धनतेरस और दिवाली के शुभ अवसर पर इस मंदिर में दर्शन करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती। वडोदरा शहर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए कैब की सुविधा उपलब्ध है।
उत्तराखंड का प्राचीन कुबेर मंदिर
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर, जागेश्वर धाम के पास ही 100 मीटर की दूरी पर एक अत्यंत प्राचीन कुबेर देव का मंदिर स्थित है। यहाँ कुबेर देव की पूजा ‘एकलिंग’ रूप में की जाती है। यह मंदिर 7वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी राजवंश के राजाओं द्वारा निर्मित कराया गया था। धनतेरस के दिन इस मंदिर के दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है।
कुबेर मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में आपको धन के देवता कुबेर के तीन विशिष्ट मंदिर मिलेंगे। इन मंदिरों में दर्शन मात्र से धन संबंधी समस्याओं का निवारण हो जाता है। पहला मंदिर उज्जैन में स्थित है, दूसरा खंडवा के ओंकारेश्वर में। तीसरा महत्वपूर्ण कुबेर देव मंदिर उज्जैन के महर्षि संदीपनि के आश्रम में स्थापित है। इस मंदिर में कुबेर देव की चतुर्भुजी (चार भुजाओं वाली) प्रतिमा विराजमान है। यहाँ कुबेर देव को पंचमेवा, अनार और मौसमी फलों का भोग लगाया जाता है। इन मंदिरों के दर्शन अवश्य करें।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
