दुर्गा पूजा 2025: हाथी पर आगमन और पालकी पर विदाई, लेकिन कोलकाता पर बारिश का कहर!
नई दिल्ली: शक्ति की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि 2025 का शुभारंभ 22 सितंबर (सोमवार) से हो चुका है। पंचांग के अनुसार, इस बार नवरात्रि 9 की बजाय 10 दिनों तक मनाई जाएगी, क्योंकि चतुर्थी तिथि 25 और 26 सितंबर को रहेगी।
दुर्गा पूजा 2025 का उत्सव शुरू
इस वर्ष दशहरा 2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को मनाया जाएगा और इसी दिन माता का विसर्जन भी होगा। हिंदू मान्यताओं में नवरात्रि का लंबा होना एक शुभ संकेत माना जाता है। साथ ही, इस बार माता दुर्गा का हाथी पर आगमन और पालकी पर प्रस्थान समृद्धि और मंगल का प्रतीक है।
मां दुर्गा का आगमन वाहन
देवी दुर्गा की पारंपरिक सवारी सिंह (शेर) है, लेकिन नवरात्रि के अवसर पर उनका आगमन और प्रस्थान विशेष वाहनों पर माना जाता है। इस वर्ष माता हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक में पधारी हैं। मान्यता है कि हाथी पर माता का आगमन होने से वर्ष भर अन्न-धन की वृद्धि, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
कोलकाता में आसमानी आफत
दुर्गा पूजा का त्योहार देशभर में मनाया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। पूरे राज्य में 10 दिनों तक जश्न का माहौल रहता है। लोग बेहद हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं। हालांकि, इस बार भारी बारिश ने इस पूरे राज्य को और इस खास पर्व के आनंद को पानी-पानी कर दिया है। कोलकाता इस समय पानी में डूब रहा है। खराब मौसम ने त्योहार में बाधा उत्पन्न कर दी है।
कोलकाता में भारी बारिश से मची तबाही
ऐसे में कोलकाता में दुर्गा पूजा की रौनक फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से त्योहार का मजा किरकिरा हो गया है। आईएमडी ने अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। हावड़ा के रेलवे यार्ड में घुटनों तक पानी घुस गया है। पानी में करंट लगने की वजह से 5 लोगों की मौत हो गई है। प्रदेश की राजधानी और उससे सटे हावड़ा के कई इलाके पूरी तरह से जलमग्न हैं। वहीं पूजा पंडालों की हालत भी खराब दिखाई दे रही है।
शुभ संकेत: पालकी पर विदाई
आपको बता दें कि इस बार माता दुर्गा पालकी पर बैठकर विदा लेंगी, जिसे हिंदू परंपरा में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। अब देखना है कि आगामी दिनों में कोलकाता की हालत कैसी रहती है।
किस वाहन पर आती हैं मां दुर्गा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता का वाहन सप्ताह के वार के अनुसार तय होता है:
- रविवार या सोमवार: माता हाथी पर आती हैं (अत्यंत शुभ)
- मंगलवार या शनिवार: माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं (शुभ नहीं)
- गुरुवार या शुक्रवार: माता डोली (पालकी) पर आती हैं (रोग और अशांति का संकेत)
माता दुर्गा का प्रस्थान वाहन
नवरात्रि के अंत में माता का प्रस्थान भी वार के अनुसार होता है और उसका अलग-अलग फल माना गया है:
- गुरुवार: माता पालकी पर सवार होकर जाती हैं (शुभ और मंगलदायक)
- रविवार और सोमवार: माता भैंसे पर जाती हैं (अशुभ)
- मंगलवार और शनिवार: माता घोड़े पर प्रस्थान करती हैं (आपदा और संकट का सूचक)
- बुधवार और शुक्रवार: माता हाथी पर जाती हैं (बहुत ही शुभ)
इस बार शारदीय नवरात्रि में माता दुर्गा का आगमन हाथी पर और प्रस्थान पालकी पर हो रहा है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार, यह वर्ष सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण का संदेश लेकर आया है।
(Disclaimer: माता के आगमन और विदाई के वाहन के बारे में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। वनइंडिया हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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