माँ गौरी की महिमा: नवरात्रि के पावन अवसर पर पढ़ें यह अद्भुत चालीसा
नई दिल्ली: नवरात्रि का उत्सव शक्ति की आराधना और भक्ति का प्रतीक है। इस पवित्र समय में, भक्त माता रानी की पूजा कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह शक्ति, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। माँ दुर्गा के नौ रूपों में से आठवां रूप माँ गौरी का है।
माँ का यह स्वरूप अत्यंत मनमोहक और सुंदर है। जो भी भक्त उन पर आस्था रखते हैं, वे कभी भी किसी भी कष्ट से पीड़ित नहीं होते। इन्हें माँ पार्वती का ही एक अंश माना जाता है। इनका वर्ण अत्यंत श्वेत है, इसी कारण इनका नाम ‘गौरी’ पड़ा।
मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
॥ चौपाई ॥
मन मंदिर मेरे आन बसो,
आरम्भ करूँ गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी,
दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधि न जानती,
पर श्रद्धा है आपार,
प्रणाम मेरा स्वीकारिये,
हे माँ प्राण आधार।
नमो नमो हे गौरी माता,
आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी घबराता,
गौरी उमा शंकरी माता।
आपका प्रिय है आदर पाता,
जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ,
मेरे सकल क्लेश मिटाओ।
सार्थक हो जाए जग में जीना,
सत्कर्मों से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,
सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,
मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहूँ,
ससुराल पक्ष का स्नेहा मैं पायु।
परम आराध्या आप हो मेरी,
फिर क्यों वर में इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,
थोड़े में बरकत भर दीजियो।
अपनी दया बनाए रखना,
भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना,
कभी न खोयूं मन का चैना।
देव मुनि सब शीश नवाते,
सुख सुविधा को वर मैं पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया,
बिन मांगे भी सब कुछ पाया।
हर संकट से उसे उबारा,
आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,
निराश मन में आस जगावे।
शिव भी आपका काहा ना टाले,
दया द्रष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान,
जग में पाए मान सम्मान।
सच्चे मन जो सुमिरन करती,
उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया द्रष्टि जब माँ डाले,
भव सागर से पार उतारे।
जपे जो ओम नमः शिवाय,
शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे,
दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।
सता गुन की हो दता आप,
हर इक मन की ज्ञाता आप,
काटो हमारे सकल क्लेश,
निरोग रहे परिवार हमेशा।
दुख संताप मिटा देना माँ,
मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय,
हठ जय माँ सब विपदाए।
जीसपे दयाल हो माता आप,
उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,
श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।
अवगुन मेरे ढक देना माँ,
ममता आंचल कर देना मां,
कठिन नहीं कुछ आपको माता,
जग ठुकराया दया को पाता।
बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
नाम धाम स्वरूप बहु तेरे,
जितने आपके पावन धाम,
सब धामों को मां प्राणम।
आपकी दया का है ना पार,
तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण में आता,
मुक्ति की वो युक्ति पाता।
संतोष धन्न से दामन भर दो,
असम्भव को माँ संभव कर दो,
आपकी दया के भारे,
सुखी बसे मेरा परिवार।
अपकी महिमा अति निराली,
भक्तों के दुःख हरने वाली,
मनोकामना पूरन करती,
मन की दुविधा पल में हरती।
चालीसा जो भी पढ़े-सुनाया,
सुयोग वर् वरदान में पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ,
सुमंगल साखी वर देना माँ।
गौरी माँ विनती करूँ,
आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये,
हो जाए उद्धहार।
हीं हीं हीं शरण में,
दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये,
पाऊँ मान सम्मान।
जय मां गौरी
गौरी चालीसा का महत्व:
- गौरी चालीसा का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
- माँ की कृपा से सिद्धि-बुद्धि, ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।
- गौरी चालीसा के प्रभाव से व्यक्ति धनी बनता है और तरक्की करता है।
- वह हर तरह के सुख का भागीदार बनता है और उसे कष्ट नहीं होता।
English summary:
Maa Gauri Chalisa Paath: Know the Maa Gauri Chalisa lyrics meaning, importance and benefits in Hindi.
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