सफला एकादशी 2025: पाएं सफलता का वरदान, जानें व्रत कथा और नियम
नई दिल्ली: आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, यानी सफला एकादशी का पावन पर्व है। यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है, जिनके आशीर्वाद से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर व्यक्ति को अतुलनीय सफलता प्राप्त होती है। मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं, उन्हें दुगना फल प्राप्त होता है।
सफला एकादशी 2025 की व्रत कथा: अनजाने में ही पूर्ण हुआ व्रत, मिला वरदान
प्राचीन काल की बात है, चम्पावती नगरी पर महिष्मान नामक एक प्रतापी राजा का शासन था। राजा के चार पुत्र थे, जिनमें से ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक अपनी दुराचारी, क्रूर और अनैतिक प्रवृत्तियों के कारण कुख्यात था। जुआ, चोरी और परस्त्रीगमन जैसे घृणित कार्यों में लिप्त लुम्पक से राजा महिष्मान अत्यंत दुखी थे और अंततः उन्होंने उसे राज्य से निष्कासित कर दिया।
राज्य से निकाले जाने के बाद लुम्पक ने जंगल में शरण ली। भूख और कष्टों से व्याकुल होकर वह चोरी करने पर विवश हो गया। एक दिन, वह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा। संयोगवश, वह दिन पौष कृष्ण एकादशी था। भूख के कारण लुम्पक कुछ भी खा न सका और इस प्रकार अनजाने में ही उसका एकादशी का व्रत संपन्न हो गया। रात्रि में ठंड से बचने के लिए वह उसी पीपल के वृक्ष के नीचे सोता रहा। अगले दिन, द्वादशी को उसने कुछ फल खाए और जल ग्रहण किया। इस अनजाने में हुए व्रत के प्रभाव से उसके पाप नष्ट होने लगे।
कुछ समय पश्चात, राजा महिष्मान शिकार करते हुए उसी जंगल में पहुंचे और अपने पुत्र लुम्पक को पहचान लिया। राजा ने देखा कि लुम्पक के स्वभाव में अद्भुत परिवर्तन आ गया था; वह पश्चाताप से भरा और शांत प्रतीत हो रहा था। लुम्पक ने अपने पिता से क्षमा याचना की और अपनी दुर्दशा का कारण बताया। भगवान विष्णु की कृपा से, राजा ने उसे क्षमा कर पुनः राज्य में स्थान दिया। लुम्पक ने इसके पश्चात धर्मपूर्वक शासन किया और अंततः वैकुंठ धाम को प्राप्त हुआ।
सफला एकादशी 2025: व्रत के नियम और आवश्यक सावधानियां
सफला एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। पूजा में की गई छोटी सी चूक भी व्रत के फल को कम कर सकती है और बाधाएं उत्पन्न कर सकती है।
व्रत में क्या करें:
- एकादशी तिथि के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- यदि निर्जल व्रत संभव न हो, तो फलाहार या केवल जल ग्रहण कर व्रत करें। व्रत में पूर्ण शुद्धता बनाए रखें।
- सफला एकादशी की व्रत कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
- गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
- अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत खोलें।
व्रत में क्या न करें:
- व्रत के दिन मांस, मछली, अंडा, शराब और लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है।
- एकादशी के दिन चावल और किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन भी निषिद्ध माना गया है।
- व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से पूर्ण शुद्धता बनाए रखें।
- किसी की बुराई करना या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना व्रत के फल को कम कर सकता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की सलाह अवश्य लें।
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