नवरात्रि का पावन पर्व: ज्ञान और संगीत की देवी मां सरस्वती का आह्वान
पूरे भारतवर्ष में नवरात्रि का उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व विशेष रूप से तीन देवियों – मां दुर्गा, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी – की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। नवरात्रि में मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है, जिन्हें विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है।
सरस्वती पूजा का शुभ समय:
- 29 सितंबर 2025: मां सरस्वती का आह्वान
- 30 सितंबर 2025: मां सरस्वती की पूजा (महाअष्टमी)
- 01 अक्टूबर 2025: सरस्वती बलिदान
- 02 अक्टूबर 2025: सरस्वती विसर्जन
ज्ञान की देवी की विशेष पूजा:
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को, पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के शुभ संयोग में, मां सरस्वती की प्रधान पूजा की जाती है। इस दिन को ‘वीणा वादिनी’ मां सरस्वती के मुख्य पूजन दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर, पठन, पाठन और लेखन जैसे कार्य स्थगित रखे जाते हैं।
सरस्वती पूजन की विधि:
इस शुभ दिन पर, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात, अपने घर में मां सरस्वती के चित्र या प्रतिमा को स्थापित करें। रोली, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, फल और मिष्ठान्न आदि का भोग लगाएं। मां सरस्वती को प्रिय सफेद रंग की मिठाई और वस्त्र अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। विधिविधान से मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें, आरती उतारें और तत्पश्चात सभी भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
इस पावन अवसर पर, 30 सितंबर 2025 को महाअष्टमी के दिन, सुर और संगीत की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना करें और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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