गोवर्धन पूजा 2025: श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ, पाएं सुख-समृद्धि का वरदान
आज गोवर्धन पूजा का पावन पर्व है, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की उस अलौकिक लीला की स्मृति में मनाया जाता है, जब उन्होंने अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन पर श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa)
॥ दोहा॥
बंशी शोभित कर मधूर,
नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बफल,
नयन कमल अभिराम ॥
पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख,
पीताम्बर शुभ साज।
जय मनमोहन मदन छवि,
कृष्णचन्द्र महाराज ॥
॥ चौपाई ॥
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।
जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥
जय नट-नागर नाग नथैया।
कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।
आओ दीनन कष्ट निवारो ॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी।
होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो।
आज लाज भारत की राखो ॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥
रंजित राजिव नयन विशाला।
मोर मुकुट वैजयंती माला ॥
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।
कटि किंकणी काछन काछे ॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे।
छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥10
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।
आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥
करि पय पान, पुतनहिं तारयो।
अका बका कागासुर मारयो ॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।
भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।
मसूर धार वारि वर्षाई ॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।
गोवर्धन नखधारि बचायो ॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।
मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो।
कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।
चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥
करि गोपिन संग रास विलासा।
सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥
केतिक महा असुर संहारयो।
कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥20
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।
उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥
महि से मृतक छहों सुत लायो।
मातु देवकी शोक मिटायो ॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी।
लाये षट दश सहसकुमारी ॥
दै भिन्हीं तृण चीर सहारा।
जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥
असुर बकासुर आदिक मारयो।
भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो।
तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे।
दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥
लखि प्रेम की महिमा भारी।
ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥
भारत के पारथ रथ हांके।
लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये।
भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥30
मीरा थी ऐसी मतवाली।
विष पी गई बजाकर ताली ॥
राना भेजा सांप पिटारी।
शालिग्राम बने बनवारी ॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो।
उर ते संशय सकल मिटायो ॥
तब शत निन्दा करी तत्काला।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।
दीनानाथ लाज अब जाई ॥
तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला।
बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया।
डूबत भंवर बचावत नैया ॥
सुंदरदास आस उर धारी।
दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो।
क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै।
बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥40
॥ दोहा ॥
यह चालीसा कृष्ण का,
पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,
लहै पदारथ चारि॥
गोवर्धन पूजा का महत्व (Govardhan Puja 2025)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार इंद्रदेव ने ब्रजभूमि पर भयंकर वर्षा की थी। तब बाल-स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी सी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर समस्त ब्रजवासियों, पशु-पक्षियों को इस विनाशकारी वर्षा से बचाया था। इस अद्भुत चमत्कार के उपलक्ष्य में, ब्रजवासी हर वर्ष गोवर्धन पूजा मनाते हैं और भगवान कृष्ण के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
Shri Krishna Chalisa के पाठ के लाभ (Govardhan Puja 2025)
श्रीकृष्ण चालीसा का नियमित पाठ जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है, घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है, तथा पारिवारिक संबंधों में प्रेम और एकता बनाए रखता है। गोवर्धन पूजा के अवसर पर विशेष रूप से इसका पाठ इंद्र देव के प्रकोप से मुक्ति दिलाता है और ग्रह बाधाओं को शांत करता है।
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