दीवाली 2026: 8 नवंबर को शाम 5:54 बजे से है महालक्ष्मी पूजन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त, जानें प्रदोष काल और चौघड़िया का सटीक समय
रोशनी का महापर्व दीवाली इस बार बेहद खास होने जा रहा है। 8 नवंबर 2026 को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए शुभ समय का विशेष महत्व है। इस साल दिवाली की शाम को लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ और उत्तम मुहूर्त ठीक 5:54 बजे से शुरू होगा। पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस विशिष्ट काल में माता लक्ष्मी का पूजन करना भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात महालक्ष्मी को अपने घर आमंत्रित करने के लिए स्थिर लग्न और सही मुहूर्त का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं 8 नवंबर 2026 को पड़ने वाले प्रदोष काल, वृषभ लग्न और चौघड़िया के उन सभी शुभ समयों के बारे में, जो आपके घर में सुख-समृद्धि और वैभव का वास कराएंगे।
दीवाली 2026: लक्ष्मी पूजन के मुख्य मुहूर्त
- पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (शुरुआत): शाम 5:54 बजे से
- प्रदोष काल का समय: प्रदोष काल वह अवधि है जब दिन ढलता है और रात शुरू होती है। इस दौरान माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का विधान सबसे उत्तम माना गया है।
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): दीवाली पूजन के लिए वृषभ लग्न को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इसे ‘स्थिर लग्न’ कहा जाता है, यानी इस दौरान मां लक्ष्मी घर में वास करने के लिए ठहरती हैं।
चौघड़िया का सही समय (दिन और रात)
दीवाली के दिन जो लोग तयशुदा मुख्य मुहूर्त के अलावा अन्य समय पर भी पूजा करना चाहते हैं, वे चौघड़िया के आधार पर शुभ मुहूर्त चुन सकते हैं:
- चर (चंचल) और लाभ चौघड़िया: कार्य में तरक्की और लाभ के लिए यह समय उत्तम माना जाता है।
- अमृत चौघड़िया: इसे सर्वोत्तम माना गया है, जिसमें किया गया हर कार्य और पूजन अक्षय फल देता है।
- शुभ चौघड़िया: घर में सकारात्मक ऊर्जा और मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए यह समय बहुत ही अनुकूल होता है।
(नोट: गृह प्रवेश, व्यापारी वर्ग, और विशेष तांत्रिक या अनुष्ठानिक पूजा करने वाले अपने शहर के समयानुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर को ध्यान में रखकर ही मुहूर्त का चयन करें।)
पूजन के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान (Guidelines):
- साफ-सफाई: पूजन से पहले अपने घर और ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को अच्छी तरह से साफ कर लें और गंगाजल का छिड़काव करें।
- चौकी की स्थापना: लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
- दीपक प्रज्वलन: शुद्ध घी का एक बड़ा दीपक और सरसों के तेल के कई दीये जलाकर पूरे घर को रोशन करें।
- भोग और मंत्र: मां लक्ष्मी को खीर, बताशे और पान का भोग लगाएं। साथ ही “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
इस बार 8 नवंबर 2026 की शाम को प्रदोष काल और शुभ चौघड़िया के इस अद्भुत संयोग का लाभ उठाएं और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से स्वागत कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करें।
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