इंदिरा एकादशी 2025: पितरों की मुक्ति का महात्म्य, जानें व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है, इसलिए इसका विशेष महत्व है। यह व्रत पितरों की मुक्ति और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। इस दिन व्रत करने से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार पर भी सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद बना रहता है।
पूजा मुहूर्त (Indira Ekadashi 2025 Puja Time Muhurat)
- आश्विन मास की इंदिरा एकादशी की तिथि का प्रारंभ: 17 सितंबर, 12:21 AM
- आश्विन मास की इंदिरा एकादशी की तिथि का अंत: 17 सितंबर, 11:39 AM
पूरा दिन पूजा के लिए उत्तम है, अर्थात आज किसी भी प्रहर में एकादशी की पूजा की जा सकती है।
इंदिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, सत्ययुग में इंद्रसेन नामक एक राजा था। वह अत्यंत धार्मिक और भगवान विष्णु का परम भक्त था। एक दिन, देवर्षि नारद उसके राज्य में पधारे और उन्होंने राजा को बताया कि उसके पिता स्वर्गलोक से पितृलोक में चले गए हैं और वहां कष्ट भोग रहे हैं। नारदजी ने राजा इंद्रसेन को सलाह दी कि यदि वे पितृ पक्ष की एकादशी पर व्रत रखेंगे तो उनके पिता को मोक्ष प्राप्त होगा। राजा ने पूर्ण श्रद्धा से व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की। परिणामस्वरूप, उनके पिता को पितृलोक से मुक्ति मिली और वे स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। तभी से इंदिरा एकादशी का व्रत पितरों की तृप्ति और मोक्ष के लिए किया जाने लगा।
इंदिरा एकादशी का महत्व (Indira Ekadashi Significance)
- इस व्रत से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
- व्रत करने वाले को पापों से मुक्ति मिलती है।
- घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
- जिनकी कुंडली में पितृदोष है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
इंदिरा एकादशी पूजन विधि (Indira Ekadashi Puja Vidhi)
- प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें।
- तुलसी, पीतल का दीपक, पंचामृत, धूप, दीप और फल-फूल से भगवान की पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- दिनभर व्रत रखें और उपवास करें, शाम को आरती करें।
- पितरों के नाम से दान-पुण्य करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
क्या करें (Do’s)
क्या न करें (Don’ts)
- इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, अनाज और तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
- निंदा, क्रोध और झूठ बोलने से बचें।
- बिना स्नान और पूजा किए भोजन ग्रहण न करें।
- किसी का अपमान या दुख न पहुंचाएं।
- व्रत का संकल्प लेने के बाद उसे बीच में न तोड़ें।
Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य किसी भी प्रकार का अंधविश्वास फैलाना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए, किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की राय अवश्य लें।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
