जगन्नाथ रथयात्रा विशेष: घर बैठे पाएं महाप्रभु की असीम अनुकंपा, आज जरूर करें इस चमत्कारी ‘जगन्नाथ चालीसा’ का पाठ
जय जगन्नाथ! आज से विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का मंगलारंभ हो रहा है। उड़ीसा के पुरी स्थित गुंडिचा मंदिर के लिए जब महाप्रभु अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर निकलते हैं, तो पूरी सृष्टि उनके स्वागत में नतमस्तक हो जाती है। यदि आप किसी कारणवश पुरी की इस पावन यात्रा में सम्मिलित नहीं हो पा रहे हैं, तो निराश न हों। भक्ति मार्ग में भाव ही प्रधान है। आज के इस विशेष दिन पर घर पर ही ‘जगन्नाथ चालीसा’ का पाठ कर आप साक्षात् वैकुण्ठ का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ इस चालीसा का गान करता है, उसके जीवन के सभी कष्टों का अंत होता है और सुख-सौभाग्य के द्वार खुल जाते हैं।
॥ श्री जगन्नाथ चालीसा ॥
दोहा
चतुर्भुज जगन्नाथ प्रभु, कलयुग के अवतार।
शरण तुम्हारी जो आए, उनका हो बेड़ा पार॥
जय जगन्नाथ दयामयी, दुखियों के आधार।
भक्ति मुक्ति वर दीजिए, नमन बारम्बार॥
चौपाई
जय जगन्नाथ जगत के स्वामी, घट-घट वासी अन्तर्यामी।
नीलाचल में वास तुम्हारा, भक्त जनों का तुम हो सहारा।
शंख चक्र गदा पद्म सुहावन, रूप अनूप परम अति पावन।
सुभद्रा संग विराजे भइया, पार लगाओ मेरी नइया।
बलभद्र अति बल के धामा, शेषनाग के तुम हो रामा।
दारु ब्रह्म मूरत अति न्यारी, दर्शन कर जाएं बलिहारी।
पतित पावन प्रभु नाम तुम्हारा, दीन दुखी का तुम हो सहारा।
रथ पर चढ़कर जब तुम आते, भक्त प्रेम के अश्रु बहाते।
महाप्रसाद तेरा अति पावन, छप्पन भोग लगे मनभावन।
जो जन भक्ति भाव से गाए, मनवांछित फल सो जन पाए।
दरिद्रता और कष्ट मिटाओ, मोक्ष का हमको मार्ग दिखाओ।
शरण पड़ा मैं दास तुम्हारा, दे दो प्रभु अपनी दया का सहारा।
दोहा
जग के स्वामी जगन्नाथ, राखो भक्तों की लाज।
कृपा दृष्टि बनी रहे, सिद्ध हों सब काज॥
जगन्नाथ चालीसा का महत्व और लाभ
हिंदू धर्म में जगन्नाथ चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का ही रूप माना जाता है, जो भक्तों के कष्टों को हरने वाले हैं।
- मानसिक शांति: इसके नियमित पाठ से मन को असीम शांति मिलती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
- कष्टों से मुक्ति: यदि जीवन में आर्थिक या शारीरिक परेशानियां बढ़ गई हैं, तो रथयात्रा के दौरान इसका पाठ करना ‘अमोघ’ फल देता है।
- पारिवारिक सुख: घर में सुख-समृद्धि और एकता बनाए रखने के लिए महाप्रभु की यह स्तुति सर्वोत्तम है।
- पापों का नाश: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जगन्नाथ जी के नाम मात्र से मनुष्य के संचित पापों का क्षय हो जाता है।
कैसे करें पाठ?
आज रथयात्रा के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले पुष्प और फल अर्पित करें। पूरी एकाग्रता के साथ जगन्नाथ चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें।
महाप्रभु जगन्नाथ आपके जीवन में खुशहाली और आनंद का संचार करें। बोलिए जगन्नाथ स्वामी की जय!
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