AMN. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में यह शुभ तिथि 3 जुलाई को पड़ रही है। ऐसे में कई महिलाएं आज ये व्रत रख रही हैं. इस दिन भगवान गणेश के कृष्णपिंगल स्वरूप की पूजा करने से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। तो आइए जानते हैं इस व्रत के बारे में।
यह कब शुरू होगा
इस दिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष की कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई 2026 को सुबह 11.20 बजे शुरू होगी और अगले दिन 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12.39 बजे समाप्त होगी। यह व्रत चंद्रमा की पूजा से संबंधित है और पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा की पूजा का समय 3 जुलाई है, इसलिए यह व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
चाँद कब निकलेगा
3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा का उदय रात्रि 09 बजकर 53 मिनट पर होगा.
पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भक्तों को स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनने चाहिए, इसके बाद पापों के विनाशक श्री गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान गणेश को तिल, गुड़, लड्डू, दूर्वा और चंदन चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं। आरती करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें।
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