नवरात्रि 2025: मां कुष्मांडा की कथा – ब्रह्मांड की निर्माता और सुख-समृद्धि की जननी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना का विधान है। मां कुष्मांडा की मन से आराधना करने से साधक के जीवन के समस्त दुखों और कष्टों का निवारण होता है। उनकी कृपा से अटके हुए कार्य भी शीघ्र संपन्न हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कुष्मांडा को यह नाम इसलिए प्राप्त हुआ, क्योंकि उनकी मनमोहक मुस्कान (कुशमंड) से ही संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई थी। नवरात्रि के इस विशेष दिन पर व्रत रखने वाले भक्त, मां कुष्मांडा की कथा का पाठ अवश्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि कथा श्रवण के बिना पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए, नवरात्रि के चौथे दिन मंत्रोच्चार, कथा श्रवण और दीप प्रज्ज्वलन का विशेष महत्व है।
मां कुष्मांडा: सृष्टि की आदि शक्ति
सनातन शास्त्रों के अनुसार, अत्यंत प्राचीन काल में त्रिदेव, अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सृष्टि के निर्माण का संकल्प लिया। उस समय चारों ओर घोर अंधकार छाया हुआ था। संपूर्ण ब्रह्मांड गहन शांति में लीन था, न कोई संगीत, न कोई ध्वनि, केवल एक असीम सन्नाटा था। इस विकट परिस्थिति में, त्रिदेव ने जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा से सहायता की याचना की। तब जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, मां कुष्मांडा ने अत्यंत शीघ्रता से सृष्टि का निर्माण किया। कहा जाता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी मनमोहक और दिव्य मुस्कान से ही ब्रह्मांड की रचना को आकार दिया। मां के मुखमंडल पर फैली इस मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशमय हो उठा। इस प्रकार, अपनी मधुर मुस्कान से सृष्टि का निर्माण करने के कारण ही जगत जननी आदिशक्ति को मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है। मां की महिमा का वर्णन शब्दों में करना कठिन है। मां का निवास स्थान सूर्य लोक है। शास्त्रों के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य लोक के केंद्र में निवास करती हैं। ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कुष्मांडा के मुखमंडल पर जो अलौकिक तेज है, वही सूर्य को अपनी प्रकाशमान आभा प्रदान करता है। मां सूर्य लोक के भीतर और बाहर, हर स्थान पर निवास करने की क्षमता रखती हैं।
मां कुष्मांडा की आराधना से प्राप्त होती है सुख-समृद्धि
मां कुष्मांडा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, धन-संपदा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, मानसिक शांति और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन भक्त अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से मां कुष्मांडा की आराधना करते हैं।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
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