शारदीय नवरात्र 2025: महाअष्टमी, महानवमी की तिथियां और कन्या पूजन की संपूर्ण विधि
नई दिल्ली: उत्तर और पश्चिम भारत में शारदीय नवरात्रों का उत्साह चरम पर है। पिछले छह दिनों से हर ओर माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं और भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रख रहे हैं। इस वर्ष नवरात्र का विशेष महत्व है, क्योंकि यह नौ नहीं, बल्कि पूरे दस दिनों का है, जिसके कारण महाअष्टमी, महानवमी और दशहरे की तारीखों को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
नवरात्र के अंतिम दिनों में कन्या पूजन और देवी की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस लेख में हम आपको महाअष्टमी और महानवमी की सटीक तिथियां, पूजा का शुभ मुहूर्त और कन्या पूजन की विस्तृत विधि के बारे में जानकारी देंगे, ताकि आप इस पावन अवसर का बिना किसी दुविधा के पूर्ण श्रद्धा के साथ लाभ उठा सकें।
महाअष्टमी: कब मनेगी देवी महागौरी की आराधना?
इस वर्ष महाअष्टमी का पर्व 30 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन आदिशक्ति के नौ रूपों में से सातवें रूप, मां महागौरी की पूजा का विधान है। मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सरलता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने विकराल राक्षसों चंड, मुंड और रक्तबीज का संहार किया था।
- महाअष्टमी तिथि का आरंभ: 29 सितंबर 2025, सायं 04:31 बजे
- महाअष्टमी तिथि का समापन: 30 सितंबर 2025, सायं 06:06 बजे
महानवमी: बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव
महानवमी का पावन पर्व 1 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा की पूजा देवी महिषासुरमर्दिनी के रूप में की जाती है, जो असुर महिषासुर का वध करने वाली देवी हैं। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
- महा नवमी तिथि का आरंभ: 30 सितंबर 2025, सायं 06:06 बजे
- महा नवमी तिथि का समापन: 01 अक्टूबर 2025, सायं 07:01 बजे
कन्या पूजन: नौनिहालों के रूप में देवी का सम्मान
महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस पूजन में घर पधारी छोटी कन्याओं के चरण सबसे पहले धोए जाते हैं और उन्हें स्वच्छ आसन पर बिठाया जाता है। तत्पश्चात, उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है और हाथों में रक्षा सूत्र (कलावा) बांधा जाता है। इसके बाद, उन्हें हलवा, पूड़ी और चने का भोग लगाया जाता है। पूजा सम्पन्न होने पर, कन्याओं को उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
विशेष नोट: इस वर्ष शारदीय नवरात्रि नौ दिनों के बजाय दस दिनों की है, इसलिए अष्टमी, नवमी और दशहरे की सही तारीखों को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अस्वीकरण: इस आलेख में दी गई तिथियां और पूजा संबंधी जानकारी पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई हैं। व्यक्तिगत मान्यताओं और स्थानीय पूजा समय में भिन्नता हो सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा और व्रत करने से पूर्व अपने स्थानीय मंदिर या धार्मिक गुरु से सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त करें। यह लेख केवल सूचना और मार्गदर्शन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
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