दर्श अमावस्या: पितरों की कृपा और श्री कृष्ण का प्रिय मास
आज मार्गशीर्ष मास की दर्श अमावस्या है, जो पितरों के तर्पण और विष्णु पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। यह शुभ घड़ी हमें अपने पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर देती है।
क्यों है मार्गशीर्ष अमावस्या खास?
भगवान कृष्ण का प्रिय मास होने के कारण मार्गशीर्ष का हर दिन विशेष होता है। इस मास की अमावस्या तिथि को पितृ दोष शांति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, विष्णु पूजा और पितरों के लिए तर्पण करने की प्राचीन परंपरा है। इस वर्ष, मार्गशीर्ष अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, और अमावस्या की तिथि दो दिन होने के कारण इसे “दर्श अमावस्या” के रूप में भी मनाया जा रहा है। यह दिन कड़ी मेहनत, पूजा और ध्यान से पुण्य अर्जित करने का उत्तम समय है।
शुभ संयोगों का संगम
इस दर्श अमावस्या पर कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:00 बजे से 5:54 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:53 बजे से 2:35 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:26 बजे से 5:53 बजे तक
- अमृत काल: 20 नवंबर मध्यरात्रि से 2:53 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:40 बजे से 12:34 बजे तक
पूजा विधि और मान्यताएं
इस पावन दिन, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर के समक्ष गंगाजल छिड़कें, जलाभिषेक करें और प्रसाद अर्पित करें। मंत्रों का जाप करें।
अहन अमावस्या का महत्व
अहन अमावस्या का महत्व दीपावली के समान माना जाता है। इस दिन किए गए धर्म-कर्म से भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन पितर देवता पृथ्वी पर आकर अपने कुटुंब के लोगों के घर जाते हैं। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर्म से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, उन्हें इस दिन विशेष उपाय अवश्य करने चाहिए।
स्नान और दान का पुण्य
गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इस दिन अपने इष्टदेव की पूजा करें, मंत्र जप करें और सामर्थ्य अनुसार दान करें। श्री कृष्ण की विशेष पूजा करें, “कृं कृष्णाय नम:” मंत्र का जप करें, बाल गोपाल का अभिषेक करें और माखन-मिश्री का भोग लगाएं। चंद्र देव की पूजा से कुंडली के चंद्र दोषों का प्रभाव कम होता है। महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पितरों की कृपा पाने के उपाय
सूर्योदय से पहले स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। पितरों की कृपा हेतु गाय, कुत्ता, कौवा, देव आदि के लिए भोजन निकालें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, कंबल, गुड़, घी, तिल, तिल के लड्डू या धन का दान करें। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु और पितरों का वास माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ पर कच्चा दूध और जल चढ़ाएं। शाम को पीपल के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।
पितृ दोष से मुक्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन श्राद्ध, पिंडदान और पंचबलि कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन पितरों के लिए स्नान, दान और तर्पण करना चाहिए, जिससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वे उन्नति व खुशहाली का आशीष देते हैं।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या का स्नान और दान किया जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त (05:01 बजे से 05:54 बजे तक) में स्नान करना उत्तम होता है।
अमावस्या पर करें इन चीजों का दान
- अनाज का दान: चावल, गेहूं और काले तिल का दान करने से पितृ शांत होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
- उड़द और कंबल का दान: साबुत उड़द और कंबल दान करने से राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
- पशु-पक्षियों के लिए दाना: पक्षियों को दाना खिलाने से पितरों को शांति मिलती है और वंश वृद्धि होती है।
पौराणिक कथा
एक अछोदा नामक आत्मा ने राजा अमावसु की पुत्री के रूप में जन्म लिया। अपनी इच्छा पूरी होने के बाद, उसने पितरों के लिए श्राद्ध की व्यवस्था की, जिससे अमावस्या पर पूर्वजों को श्राद्ध और तर्पण अर्पित करने की प्रथा की शुरुआत हुई।
दर्श अमावस्या का महत्व
यह दिन पितरों को समर्पित है, और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। चंद्रमा की पूजा से सौभाग्य और समृद्धि आती है। इस दिन किए गए अनुष्ठान पितृ दोष को दूर करने और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य व सुख के लिए पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करते हैं।
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