नरक चतुर्दशी 2025: छोटी दिवाली का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: पांच दिवसीय दीवाली उत्सव का दूसरा दिन, जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है, इस बार 19 और 20 अक्टूबर के बीच उलझन पैदा कर रहा है। यह वही दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर दुनिया को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था।
तिथि को लेकर स्पष्टता:
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 19 अक्टूबर को दोपहर 01:51 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 03:44 बजे तक रहेगी। इस कारण, यमराज के नाम का दीपक 19 अक्टूबर की शाम को जलाया जाएगा, जबकि रूप चौदस का स्नान 20 अक्टूबर को होगा।
परंपरा और मान्यताएं:
इस दिन यमराज के नाम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। वहीं, रूप चौदस के दिन प्रात:काल में अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति निरोगी बनता है और उसके रूप में निखार आता है। यह स्नान शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए माना जाता है, जिसमें नहाने से पहले शरीर पर तेल लगाया जाता है।
पूजा विधि:
नरक चतुर्दशी की पूजा विधि इस प्रकार है:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तेल स्नान करें।
- तिल के तेल का दीपक जलाएं और उसे घर के बाहर, आँगन या तुलसी के पास रखें।
- भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी और यमराज की पूजा करें। उन्हें फूल, मिठाई और तेल का दीपक अर्पित करें।
- शाम को घर के हर कोने में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- गरीबों को दीपक, वस्त्र, भोजन या अनाज दान करें।
सकारात्मकता का संदेश:
नरक चतुर्दशी शुद्धता, प्रकाश और सकारात्मकता का संदेश देती है। इस दिन क्रोध, झगड़ा या नकारात्मक बातों से बचना चाहिए। मांसाहार, मद्यपान या तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। झूठ बोलना और किसी का अपमान करना पाप माना गया है।
अस्वीकरण:
यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिषी या पंडित की राय अवश्य लें।
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