महानवमी 2025: कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त, तिथि और महत्व – जानिए सब कुछ
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे भारत में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। कहीं दुर्गा पूजा की धूम है, तो कहीं डांडिया रास की थिरकन। भक्त नौ दिनों तक मां का उपवास रख रहे हैं और घर-घर में कलश पूजा का विधान चल रहा है। इस वर्ष नवरात्रि पूरे 10 दिनों की होने के कारण महानवमी की तिथि को लेकर कुछ दुविधा उत्पन्न हो गई है।
महानवमी की तिथि को लेकर स्पष्टता:
कुछ लोगों का मानना है कि महानवमी 30 सितंबर को है, वहीं कुछ के अनुसार यह 1 अक्टूबर को पड़ रही है। दरअसल, महानवमी के दिन ही कन्या पूजन किया जाता है और उसके पश्चात हवन के साथ नवरात्रि पूजा का समापन होता है, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, महानवमी का प्रारंभ 30 सितंबर 2025 को शाम 6:06 बजे होगा और इसका समापन 1 अक्टूबर 2025 को सुबह 7:02 बजे होगा। उदयातिथि के मान्य होने के कारण, इस वर्ष महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
महानवमी 2025 पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त:
- 1 अक्टूबर – 4:53 AM से 5:41 AM
- 1 अक्टूबर – 8:06 AM से 9:50 AM
महानवमी 2025 का महत्व:
महानवमी के दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा का विधान है, जिससे सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह दिन शक्ति साधना और नवदुर्गा उपासना का चरम बिंदु माना जाता है। कन्या पूजन से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
महानवमी 2025 पर कन्या पूजन का महत्व:
कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है। उन्हें देवी का स्वरूप मानकर उनके चरणों को धोया जाता है, तिलक लगाया जाता है और श्रद्धापूर्वक उनका पूजन किया जाता है। कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें उपहार देना मां दुर्गा को अर्पण करने के समान माना जाता है।
महानवमी 2025 पर कन्या पूजन की विधि:
सर्वप्रथम, सुबह स्नान करके घर की साफ-सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर पर लाल रंग की चुनरी ओढ़ाएं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करें और उन्हें पुष्प, अक्षत, नारियल व लाल वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को घर बुलाकर उनके चरण धोएं और उन्हें आसन पर बिठाएं। उनके माथे पर रोली और अक्षत से तिलक लगाएं तथा कलावा से रक्षा सूत्र बांधें। कन्याओं को पूरी, हलवा, चना, खीर आदि का भोग लगाकर उन्हें भोजन कराएं। भोजन के पश्चात उन्हें चुनरी, बर्तन, खिलौने या कोई उपयोगी वस्तु उपहार में दें। अंत में, उनका आशीर्वाद लेकर पूजा का समापन करें।
अस्वीकरण: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी की पुष्टि के लिए कृपया किसी पंडित या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
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