माता पार्वती की कृपा बरसाएं: पढ़ें विशेष पार्वती चालीसा, पाएं सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान
नई दिल्ली: हर सोमवार, मन को शांति और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए मां पार्वती की चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान शिव की अर्धांगिनी और शक्ति की स्वरूपिणी मां पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख-सौभाग्य, समृद्धि, अटूट वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पार्वती चालीसा: शक्ति, धैर्य और पारिवारिक सुख का संगम
पार्वती चालीसा का पाठ साधक को न केवल अलौकिक शक्ति और धैर्य प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक सुख-समृद्धि में भी वृद्धि करता है। विशेष रूप से, कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति हेतु और विवाहित स्त्रियां अपने दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए इस चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करती हैं।
यहां पढ़ें संपूर्ण पार्वती चालीसा, जानें इसका महत्व और लाभ
॥ दोहा ॥
जय गिरी तनये डग्यगे शम्भू प्रिये गुणखानी
गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवामिनी
॥ चालीसा ॥
ब्रह्मा भेद न तुम्हरे पावे, पांच बदन नित तुमको ध्यावे
शशतमुखकाही न सकतयाष तेरो, सहसबदन श्रम करात घनेरो।
तेरो पार न पाबत माता, स्थित रक्षा ले हिट सजाता
आधार प्रबाल सद्रसिह अरुणारेय, अति कमनीय नयन कजरारे।
ललित लालट विलेपित केशर कुमकुम अक्षतशोभामनोहर
कनक बसन कञ्चुकि सजाये, कटी मेखला दिव्या लहराए।
कंठ मदार हार की शोभा, जाहि देखि सहजाई मन लोभ
बालार्जुन अनंत चाभी धारी, आभूषण की शोभा प्यारी।
नाना रत्न जड़ित सिंहासन, टॉपर राजित हरी चारूणां
इन्द्रादिक परिवार पूजित, जग मृग नाग यज्ञा राव कूजित।
श्री पार्वती चालीसा गिरकल्सिा,निवासिनी जय जय,
कोटिकप्रभा विकासिनी जय जय।।6।।
त्रिभुवन सकल, कुटुंब तिहारी, अनु -अनु महमतुम्हारी उजियारी
कांत हलाहल को चबिचायी, नीलकंठ की पदवी पायी।
देव मगनके हितुसकिन्हो, विश्लेआपु तिन्ही अमिडिन्हो
ताकि, तुम पत्नी छविधारिणी, दुरित विदारिणीमंगलकारिणी।
देखि परम सौंदर्य तिहारो, त्रिभुवन चकित बनावन हारो
भय भीता सो माता गंगा, लज्जा मई है सलिल तरंगा।
सौत सामान शम्भू पहायी, विष्णुपदाब्जाचोड़ी सो धैयी
टेहिकोलकमल बदनमुर्झायो, लखीसत्वाशिवशिष चड्यू।
नित्यानंदकरीवरदायिनी, अभयभक्तकरणित अंपायिनी।
अखिलपाप त्र्यतपनिकन्दनी, माहीश्वरी, हिमालयनन्दिनी।
काशी पूरी सदा मन भाई सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायीं।
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दातृ, कृपा प्रमोद स्नेह विधात्री।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे, वाचा सिद्ध करी अबलाम्बे
गौरी उमा शंकरी काली, अन्नपूर्णा जग प्रति पाली।
सब जान, की ईश्वरी भगवती, पति प्राणा परमेश्वरी सटी
तुमने कठिन तपस्या किणी, नारद सो जब शिक्षा लीनी।
अन्ना न नीर न वायु अहारा, अस्थिमात्रतरण भयुतुमहरा
पत्र दास को खाद्या भाऊ, उमा नाम तब तुमने पायौ।
तबन्लोकी ऋषि साथ लगे दिग्गवान डिगी न हारे।
तब तब जय, जय, उच्चारेउ, सप्तऋषि, निज गेषसिद्धारेउ।
सुर विधि विष्णु पास तब आये, वार देने के वचन सुननए।
मांगे उबा, और, पति, तिनसो, चाहत्ताज्गा, त्रिभुवन, निधि, जिन्सों।
एवमस्तु कही रे दोउ गए, सफाई मनोरथ तुमने लए
करी विवाह शिव सो हे भामा, पुनः कहाई है बामा।
जो पढ़िए जान यह चालीसा, धन जनसुख दीहये तेहि ईसा।
।। दोहा ।।
कूट चन्द्रिका सुभग शिर जयति सुच खानी
पार्वती निज भक्त हिट रहाउ सदा वरदानी।
पार्वती चालीसा का महत्व:
- सुख-सौभाग्य में वृद्धि: इस चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख-सौभाग्य में अनवरत वृद्धि होती है।
- सिद्धि-बुद्धि और धन-बल: मां पार्वती की कृपा से साधक को सिद्धि-बुद्धि, धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।
- समृद्धि और तरक्की: मां पार्वती के प्रभाव से व्यक्ति धनी बनता है और जीवन में निरंतर तरक्की करता है।
- कष्टों से मुक्ति: यह चालीसा व्यक्ति को हर तरह के सुख का भागीदार बनाता है और उसे कष्टों से दूर रखता है।
- तेजस्वी जीवन: मां पार्वती की कृपा मात्र से ही व्यक्ति सारी परेशानियों से मुक्त हो जाता है और एक तेजस्वी जीवन जीता है।
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