प्रेमानंद जी की वाणी: एकादशी व्रत में न करें ये भूल, जानें खास नियम

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
premanad Ji maharaj Tips

एकादशी व्रत का महत्व और प्रेमानंद जी के अनमोल उपदेश

एकादशी का व्रत, सभी व्रतों में सबसे उत्तम माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पुराने पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में अपार शांति व संतोष का अनुभव होता है। इसके अतिरिक्त, घर में सुख-संपत्ति का वास होता है और स्वयं भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, कई बार ऐसा देखा जाता है कि व्यक्ति एकादशी का व्रत तो रखता है, पर उसे उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। इसका मुख्य कारण व्रत के नियमों और संयम का पूर्ण रूप से पालन न करना ही होता है। आइए, जानते हैं प्रेमानंद जी द्वारा बताए गए कुछ ऐसे महत्वपूर्ण नियम, जिनके पालन से एकादशी व्रत का फल अवश्य प्राप्त होता है।

तीन दिवसीय संयम का विधान

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए तीन दिनों तक संयम बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है – दशमी, एकादशी और द्वादशी। इन तीनों दिनों में अपने भोजन और आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। केवल शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें और अपने शरीर, मन एवं वाणी पर कड़ा संयम बनाए रखें।

क्या न करें, यह जानना भी महत्वपूर्ण

इस अवधि के दौरान मांस, मछली, मदिरा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन पूर्णतः वर्जित है। खेल-कूद, मोबाइल, टीवी या अन्य किसी भी प्रकार के अनावश्यक मनोरंजन से दूरी बनाए रखना चाहिए। किसी की निंदा करना, झूठ बोलना, चोरी करना या किसी भी जीव को दुख पहुंचाना भी निषेध है। पान, धूम्रपान और अन्य किसी भी प्रकार के अशुद्ध आहार से परहेज करना चाहिए। जितना संभव हो सके, मौन रहकर ध्यान, भजन या कीर्तन में समय व्यतीत करने से व्रत का पुण्य और भी बढ़ जाता है।

पूरी रात जागकर करें कीर्तन-भजन

एकादशी की रात को पूरी रात जागकर ईश्वर का कीर्तन या भजन करना सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया है। व्रत के दौरान फलाहार, दूध और शुद्ध जल का सेवन किया जा सकता है।

व्रत का वास्तविक फल

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, जो भक्त इन बताए गए नियमों का पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से पालन करता है, वही एकादशी व्रत का वास्तविक पुण्य और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का अधिकारी बनता है।

Also Read: पापांकुशा एकादशी कथा: पापांकुशा एकादशी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान विष्णु की कृपा से कटेंगे सभी पाप

Disclaimer: यहां प्रस्तुत जानकारी केवल मान्यताओं और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित है। अवेयर मीडिया न्यूज़ किसी भी प्रकार की मान्यता या जानकारी की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version