21 सितंबर, 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, क्या करें, क्या न करें?

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21 सितंबर, 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, क्या करें, क्या न करें?
Surya Grahan 2025 Dos-Don'ts: 21 सितंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, क्या करें और क्या ना करें? | Surya Grahan 2025 Dos-Don'ts: Solar eclipse on 21st September, Here is Kya kare aur Kya na kare, Details Hindi

सूर्य ग्रहण 2025: करें ये काम, बचें इन गलतियों से, ताकि आप पर न पड़े बुरा असर!

नई दिल्ली: साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने जा रहा है। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और नवरात्रि की पूजा पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव राशियों पर अवश्य पड़ता है। ऐसे में, ग्रहण काल के दौरान कुछ सावधानियां बरतना बहुत ज़रूरी है।

ग्रहण का समय:
21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण रविवार रात 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 22 सितंबर को सुबह 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।


सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें (Do’s):

  • ईश्वर का स्मरण: ग्रहण काल के समय भगवान का स्मरण करें, मंत्रों का जाप करें और ध्यान लगाएं। यह समय साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। माना जाता है कि ध्यान करने से व्यक्ति का तनाव कम होता है और भय समाप्त होता है।
  • दान-पुण्य: ग्रहण के बाद गंगा जल या स्वच्छ जल से स्नान करना चाहिए। ब्राह्मणों को दान देना शुभ फलदायी होता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
  • तुलसी का प्रयोग: घर में रखे खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दें। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान धार्मिक मंत्रों का जाप करना और मन को शांत रखना चाहिए। उन्हें भारी काम और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें (Don’ts):

  • भोजन का सेवन वर्जित: ग्रहण के समय भोजन, जल, दूध या अन्य खाने की चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सोना और आलस्य वर्जित: ग्रहण के दौरान सोना, आलस्य करना या शारीरिक संबंध बनाना अशुभ माना गया है।
  • धारदार वस्तुओं का प्रयोग वर्जित: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के समय कैंची, चाकू, सुई या अन्य किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • मूर्तियों को छूना वर्जित: ग्रहण के दौरान मंदिर की मूर्तियों को छूना या पूजा-अर्चना करना मना है। केवल मन से प्रभु का ध्यान करें।

अस्वीकरण: इस लेख का उद्देश्य किसी भी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय अवश्य लें।



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