शरद पूर्णिमा: अमृत की रात, धन और स्वास्थ्य का संगम
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है, जिसे कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन तिथि पर देवी लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं। इस अमृत की बूंदों से सराबोर खीर का सेवन रोगों को दूर कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में देवी लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं, और भक्त उनकी आराधना में जागते हैं। इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय न केवल स्वास्थ्य लाभ देते हैं, बल्कि धन-धान्य में भी वृद्धि करते हैं।
देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय:
शरद पूर्णिमा की रात को श्रद्धापूर्वक देवी लक्ष्मी के ‘श्री सूक्त’ का पाठ करें और उनके मंत्रों का जाप करें। रात्रि जागरण कर देवी की आराधना से वे प्रसन्न होती हैं और जीवन के सभी कष्ट दूर करती हैं। ‘ओम श्रीम श्रियै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से सुख-समृद्धि आती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है। आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह उपाय अत्यंत लाभकारी है।
अमृत समान खीर का प्रसाद:
इस दिन चावल की खीर को चांदनी रात में रखना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की सोलह कलाओं के गुण इस खीर में समाहित हो जाते हैं। अगले दिन इस अमृत समान खीर का प्रसाद के रूप में सेवन करने से न केवल रोग दूर होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य भी उत्तम होता है। यह उपाय व्यवसाय, करियर और रिश्तों की समस्याओं को भी हल करने में सहायक सिद्ध होता है।
मनोकामना पूर्ति का अचूक उपाय:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने महारासलीला की रचना की थी। श्री कृष्ण के मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शरद पूर्णिमा की रात में, एक सफेद कागज पर हरे रंग की कलम से अपनी इच्छा लिखें। इस कागज को भगवान कृष्ण के समक्ष रखकर ‘ओम क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। अगले दिन इस कागज को जलाकर उसकी राख को फूंक मार देने से आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।
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