विजय दशमी 2025: शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और विधि
विजय दशमी, जिसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की विजय का पावन पर्व है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इसी उपलक्ष्य में रावण दहन किया जाता है। लेकिन इस दिन शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व है, जो प्राचीन काल से चली आ रही है।
दशहरा 2025: शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष विजय दशमी का पर्व 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। आश्विन शुक्ल दशमी तिथि दोपहर 07:10 बजे तक रहेगी, जिसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शस्त्र पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 02:09 बजे से 02:56 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत मुहूर्त, जो कि पूजा के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है, दोपहर 01:28 बजे से 02:51 बजे तक रहेगा।
शस्त्र पूजा का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पूर्व अपने शस्त्रों का विधिवत पूजन किया था। इसी प्रकार, आदिशक्ति मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के पश्चात अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का अर्चन किया था। प्राचीन काल में क्षत्रिय योद्धाओं द्वारा भी युद्ध में विजय की कामना से शस्त्र पूजा का विधान प्रचलित था।
शस्त्र पूजा की विधि
विजय दशमी के शुभ दिन, प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर शस्त्र पूजा के लिए निर्धारित शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें। सभी अस्त्र-शस्त्रों को एक चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर रखें। गंगाजल से उनका अभिषेक कर, उन पर मौली (कलावा) बांधें, तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें। तत्पश्चात चंदन, अक्षत, धूप और दीप प्रज्वलित कर विधि-विधान से पूजा संपन्न करें।
शस्त्र पूजा के लाभ
शास्त्रों के अनुसार, शस्त्र पूजा करने से जीवन की समस्त कठिनाइयां, भय और शोक का निवारण होता है। इस पूजा के प्रभाव से व्यक्ति में आत्म-विश्वास और अदम्य शक्ति का संचार होता है, जिससे वह जीवन की किसी भी चुनौती का सामना धैर्य और साहस से कर पाता है।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
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