विश्वकर्मा जयंती का शुभ मुहूर्त: चालीसा पाठ से पूरी होगी हर कामना!

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श्री विश्वकर्मा चालीसा का पाठ

विश्वकर्मा चालीसा: निर्माण और सृजन के देवता का अभिनन्दन

हिंदू धर्म में, भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड के Grand Architect के रूप में पूजा जाता है। हर साल 17 सितंबर को, यह पावन दिन देवताओं के शिल्पकार का सम्मान करने के लिए समर्पित है। यह वह समय है जब हम अपनी मशीनों, औज़ारों, वाहनों और तकनीकी उपकरणों की पूजा करते हैं, जो हमारे जीवन को सुविधाजनक और प्रगतिशील बनाते हैं। इस शुभ अवसर पर, भगवान विश्वकर्मा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विश्वकर्मा चालीसा का पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

॥ दोहा ॥

हाथ जोड़कर, मन, वचन और कर्म से स्मरण करते हुए, विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है;
हे विश्वकर्मा, दुष्टों के शत्रु, मेरी इच्छाओं को पूर्ण करें।

॥ चौपाई ॥

हे विश्वकर्मा, आपका नाम अतुलनीय है, जो शांति और सुख प्रदान करता है, और मन को प्रसन्न करता है।
आपका सुंदर यश तीनों लोकों में व्याप्त है, जिसकी प्रतिदिन मनुष्य और देव-दानव गुणगान करते हैं।

माता शारदा, शेषनाग, शिव-पार्वती, बुद्धिमान कवि और विद्वान जन,
सभी वेदों, पुराणों और शास्त्रों में आपके असीम गुणों का गान करते हैं।

जग में जितने भी परोपकारी और धर्मनिष्ठ संत हैं, जैसे सनकादि ऋषि,
वे सभी प्रतिदिन आपके यश का गुणगान करते हैं, हे मेरे धन्य विश्वकर्मा!

आदि सृष्टि के समय आप अविनाशी थे, और मोक्षधाम को त्यागकर इस भूमि पर पधारे।
आपकी ही शुभ रचनाओं से चारों लोकों में कीर्ति और कला का विस्तार हुआ।

जब ब्रह्मचारी आदित्य हुए, और फिर वेद पारंगत ऋषि बने,
तब आपने दर्शन शास्त्र, विज्ञान और पुराणों का ज्ञान, और कला व इतिहास की सुगंध फैलाई।

आप ही आदि विश्वकर्मा कहलाए, और चौदह विद्याओं का विस्तार भू पर किया।
धातु, काष्ठ, तांबा, स्वर्ण और पंचधातुओं से बनी शिलाओं की कला का आपने सृजन किया।

आपने शिक्षा देकर दुख और दरिद्रता का नाश किया, और जगत में सुख-समृद्धि का प्रकाश फैलाया।
सनकादि ऋषि आपके शिष्य बने, और ब्रह्मा जैसे मुनीश्वरों ने भी आपको पुकारा।

इसी कारण आप जगतगुरु हुए, और आपने अज्ञान के अंधकार को दूर किया।
आपके दिव्य और अलौकिक गुण हैं, विघ्नों को दूर करने वाले और भय को हरने वाले।

सृष्टि के निर्माण के लिए आपका नाम ब्रह्मा से विश्वकर्मा हुआ।
आप विष्णु की तरह जगत के रक्षक, और शिव की तरह कल्याणदायक हैं, अनुपम।

हे विश्वकर्मा देव, आपको नमन है, आप सेवा करने वालों के लिए सुलभ हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
देव, दानव, किन्नर और गंधर्व सभी आपके चरणों में वंदन करते हैं।

जिनके हृदय में आपकी अचल भक्ति है, उनके हाथों में चारों पुरुषार्थ सुलभ हो जाते हैं।
आपकी सेवा करके तीनों लोकों के प्राणी पवित्र होते हैं, और भवसागर से पार उतरते हैं।

हे देवों के देव विश्वकर्मा, आप सेवा करने वालों को अलौकिक फल देते हैं।
आप लौकिक कीर्ति और कला के भंडार हैं, और तीनों लोकों में यश का विस्तार करने वाले दाता हैं।

आपने भुवन पुत्र विश्वकर्मा के रूप में अवतार लिया, और अथर्ववेद के तत्वों का मनन किया।
अथर्ववेद, शिल्प शास्त्र और धनुर्वेद, ये सभी आपके कार्य हैं।

जब-जब देवताओं पर बड़ी विपत्ति आई, तब-तब आपने अपनी कला से कष्टों को दूर किया।
विष्णु के चक्र, ब्रह्मा के कमंडल, और शिव के त्रिशूल, सभी का निर्माण आपने भूमंडल पर किया।

इंद्र का धनुष, शिव का पिनाक, और पुष्पक विमान, ये सभी आपके अलौकिक कार्य हैं।
वायुयान, उड़ने वाले खटोले, और विद्युत कला, ये सभी तंत्र आपके द्वारा खोले गए।

सूर्य, चंद्रमा, नवग्रह, और दिगपाल, ये सभी लोक-लोकांततर और पाताल आपके ही प्रकाश हैं।
अग्नि, वायु, पृथ्वी, जल और आकाश, सभी आविष्कार आपके द्वारा ही प्रकाशित हुए।

मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी, और देवागम मुनि, ये सभी आपके कुशल शिष्य हैं।
लकड़ी, शिला, तांबा, और स्वर्णकार, ये सभी पंचधातु शिल्पी आपके ही धर्मावलंबी हैं।

कृतयुग में शिव, दधीचि, हरिश्चंद्र, और भुआरा जैसे विद्वानों ने आपकी शिक्षा का पालन किया।
त्रेतायुग में परशुराम, नल, नील, सुचेता, रावण, और राम जैसे महानुभाव आपके शिष्य थे।

द्वापरयुग में द्रोणाचार्य ने आपके कुल की शोभा बढ़ाई।
युधिष्ठिर ने मयकृत शिल्प प्राप्त किया, और विश्वकर्मा के चरणों का ध्यान किया।

आपने अनेक प्रकार की मायावी रचनाएं कीं, जैसे विक्रम की पुतली, जिसका कोई अंत नहीं।
हे वर्णातीत, अकथनीय गुणों वाले, हे भय को दूर करने वाले, आपको नमन है।

॥ दोहा ॥

हे प्रभु विश्वकर्मा, आपकी दिव्य ज्योति, आपका दिव्य अंश, आपका दिव्य ज्ञान प्रकाशमय है।
आप तीनों कालों में दिव्य दृष्टि से सबको देखते हैं, विश्वकर्मा प्रभास।

हाथ जोड़कर प्रार्थना है, हे युग-पावन, आपका सुयश महान है।
हृदय में धारण कर, आप पर प्रेम करते हुए, आपकी कृपा का अनुभव करें।

॥ छन्द ॥

जो मनुष्य प्रेम, वैराग्य और श्रद्धा के साथ, इस चालीसा का पाठ करेगा और सुनेगा।
विश्वास करके, चालीसा की चौपाइयों का मनन और गुणगान करेगा।

हे प्रभु विश्वकर्मा, उन्हें सांसारिक बंधनों और विघ्नों से दूर करें।
निश्चित रूप से मोक्ष का सुख प्रदान करेंगे, और कष्टों व विपदाओं को चूर करेंगे।


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